सचिन केजरीवाल की रिपोर्ट
वर्तमान में भुगतान मांग रहे निवेशकों का पैसा नही है सेबी के पास
साहिबगंज
पिछले कुछ सालों से जिले की सहारा शाखा ने अपने निवेशकों को भुगतान के लिए परेशान कर रखा है, मगर उनका भुगतान नही किया जा रहा है, जिसका कारण कार्यालय कर्मचारियों द्वारा शाखा के पास भुगतान के लिए फंड न होना बताया जा रहा है| मामले में दिलचस्प बात ये है कि कार्यालय द्वारा सहारा समूह के लिए धन उगाही का काम तो पहले की तरह ही किया जा रहा है, मगर बात जब भुगतान की आती है तो इनके पास फंड नहीं होता है। जानकारी के लिए बता दे कि कार्यालय कर्मचारियों द्वारा अपने निवेशकों को सहारा बनाम सेबी विवाद का हवाला देते हुए सहारा समूह का करोड़ों रुपए का सेबी के पास फंसा होना की बात बता कर सहानुभूति बटोरने या निवेशकों को बरगलाने का प्रयास किया जा रहा हैं। जबकि हमे हमारे विभिन्न सूत्रों से जो जानकारी प्राप्त हुई है उसके अनुसार भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) ने अपने पास जो करोड़ों रुपए की रकम रखी है वो सहारा समूह के तहत चल रही विभिन्न स्कीमों में से सिर्फ दो स्कीमों की रकम है, और इन दोनों स्कीमों के तहत जमा धन के दावेदार के रूप में कोई इक्का दुक्का ही निवेशक सामने आए हैं, क्योंकि भुगतान के लिए निवेशकों द्वारा अब तक जितने भी कागजातों को दिखाया गया है उनमें से किसी का संबंध इन दोनों स्कीमों से नही है। सेबी द्वारा जमा सहारा सेबी एस्क्रो खाते में जमा रकम जिन दो स्कीमों की है उसमे से पहली हाउसिंग फाइनेंस और दूसरी रियल एस्टेट है, जिनके नाम पर सहारा द्वारा गैर कानूनी तरीके से सेबी द्वारा निर्धारित नियमों की अवहेलना करते हुए बाजार से उठाई गई थी, इस मामले को ले कर तत्कालीन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह द्वारा करवाई की गई थी| जिसके बाद सहारा समूह पर सेबी ने शिकंजा कसा था, इस हिसाब से वर्तमान में जो निवेशक अपने भुगतान के लिए भटक रहें हैं वो पैसा सहारा समूह के पास ही है चाहे वो संपत्ति के रूप में हो या फिर लिक्विड हो, क्योंकि की भुगतान की आस में आए निवेशकों का इन दोनों स्कीमों से कोई लेना देना है|एक और महत्वपूर्ण बात जो अक्सर शाखा कर्मचारी भुगतान मांगने आए अपने निवेशकों को बताते हैं की सहारा समूह अपनी संपत्तियों की बिक्री नहीं कर सकता है क्योंकि की बिक्री किए जाने पर आने वाला पैसा सेबी के खाते में चला जाएगा, कुल मिला कर अगर देखा जाए तो सहारा समूह मामले में अपने आप को पूरी तरह से निर्दोष साबित करते हुए अपनी गलतियों का सेबी पर सारा ठिकड़ा फोड़ने की कोशिश कर रहा है। जबकि सच्चाई ये है की समूह ने पहले गलती की फिर अपने निवेशकों का पैसा फंसाया और अब खुद को निर्दोष साबित करने में जुटा हुआ है। इधर भुगतान नही होने की स्तिथि में जहां निवेशक परेशान हैं वहीं एजेंट की भी मुश्किलें बढ़ती दिख रही है, क्योंकि निवेशकों का सामना सबसे ज्यादा एजेंटों को ही करना पड़ रहा है। बता दें कि अभी हाल ही में साहिबगंज में सहारा से नाराज निवेशकों ने भुगतान के लिए एक कमिटी का गठन किया है और जिला उपायुक्त समेत प्रधानमंत्री, सेबी प्रमुख इत्यादि को पत्र लिख कर इन दोनों स्कीमों का एस्क्रो खाते में जमा के संबंध में भी जांच की मांग की है।




