रिपोर्ट – अरविंद कुमार
समस्तीपुर। बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतरने लगा हो, लेकिन मोहिउद्दीननगर प्रखंड के कुरशाह गांव में प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। घरों में जमा गंदगी, स्वास्थ्य का खतरा और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट आज भी लोगों के सामने चुनौती बना हुआ है। ऐसे मुश्किल समय में द उम्मीद – मिशन राहत जरूरतमंद परिवारों के बीच उम्मीद और सहयोग का संदेश लेकर पहुंचा।
राष्ट्रीय सेवा योजना और राष्ट्रीय कैडेट कोर के पूर्ववर्ती कैडेटों द्वारा संचालित सामाजिक संस्था द उम्मीद की ओर से कुरशाह गांव में राहत अभियान चलाकर सैकड़ों प्रभावित परिवारों के बीच आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इस दौरान परिवारों को मच्छरदानी, कपड़े, ब्लीचिंग पाउडर, जीवन रक्षक घोल सहित अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई।
राहत सामग्री मिलने पर कई परिवारों के चेहरों पर राहत और संतोष नजर आया। बाढ़ के कारण परेशान लोगों के बीच स्वयंसेवकों की मौजूदगी ने उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि मुश्किल की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं।
राहत सामग्री वितरण के साथ संस्था के स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और बाढ़ के बाद होने वाले संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक किया। लोगों को साफ-सफाई रखने, दूषित पानी से बचने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की जानकारी दी गई।
द उम्मीद के संस्थापक अमरजीत कुमार ने कहा कि बाढ़ का पानी उतर जाने के बाद भी प्रभावित परिवारों का संघर्ष समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा, “बाढ़ के बाद लोगों के घरों में पानी भले न हो, लेकिन उनकी परेशानियां अभी भी बनी हुई हैं। ऐसे समय में उनके बीच पहुंचना और उनकी जरूरतों में साथ खड़ा होना ही सच्ची मानव सेवा है।”
उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल राहत सामग्री बांटना नहीं, बल्कि आपदा से प्रभावित परिवारों के बीच सहयोग, संवेदना और उम्मीद पहुंचाना भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि द उम्मीद – मिशन राहत के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों की सहायता का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
इस मानवीय अभियान में द उम्मीद की टीम और स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। राहत कार्य के दौरान स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों की जरूरतों को समझने और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया।



