रिपोर्ट – अमित कुमार!
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संघर्ष समिति बिहार ने बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सही समय पर कराने की खुली मांग की है।
संघ अध्यक्ष जगन्नाथ चौपाल जी द्वारा प्रमुख मांगे उठाई गई है। संवैधानिक सीमा का पालन हो, पंचायती राज का कार्यकाल पांच साल है, चुनाव अधिनियम अनुच्छेद 243 का पालन हो।
पंचायत परिसीमन 2011 पर क्यों किया जा रहा है जब 2026-27 में जनगणना हो रही है और बिहार सरकार का गजट और महामहिम राज्यपाल का आदेश है कि 31 मार्च 2027 तक परिसीमन किसी भी कीमत पर नहीं होगी। फिर बिहार गजट अधिसूचना 514-4 की अवहेलना सरकार क्यों कर रही है।
बिहार सरकार वित्तीय दिवालियापन के कगार पर है। अगर 3000 से 4000 नये पंचायत बनते हैं तो राज्य पर एकमुश्त बोझ बढ़ेगा। पंचायत भवन, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय, सचिव, कर्मचारी, कार्यपालक सहायक, जेई, सफाईकर्मी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी सभी की बहाली और सभी का वेतन करोड़ों अरबों का बोझ होगा। सरकार पहले बजट पारित करे।
नये पंचायत का कोई रोड मैप सरकार के पास नहीं है। न बजट है, न जमीन चिन्हित है, न कोई व्यवस्था है, इससे ग्रामीण जनता को कई साल तक भटकना पड़ेगा।
हमारा समाधान और मांग है कि परिसीमन को तुरंत स्थगित किया जाय और 2026 में पुरानी सीमा पर ही पंचायत चुनाव करा लिया जाय। चुनाव के बाद 2026-27 की जनगणना का डाटा आने पर वैज्ञानिक तरीके से समय देकर सही ढंग से परिसीमन कराया जाय। तब तक सरकार अपना रोड मैप तैयार कर ले कि कितने नये पंचायत बनेंगे, कहां भवन बनेगा, कितना बजट है और नये स्टाफ की पहले बहाली करे। वित्तीय प्रबंध पहले हो, बिना फंड और स्टाफ बहाली की घोषणा के ग्रामीण जनता का भला नहीं हो सकेगा।
संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता कुन्दन कुमार JRF Asst Professor Topper, रंजन कुमार, राहुल कुमार यादव, उपेन्द्र कुमार निराला, तौहिद आलम, धर्मेन्द्र क्रान्तिकारी, बृजकिशोर सिंह, अनिल सिंह, जितेन्द्र सिंह, उमेश मंडल, तनवीर आलम एवं सभी 38 जिला के भावी पंचायत प्रत्याशी।



