बी.एड विभाग में बिना विज्ञापन नौ शिक्षकों की नियुक्ति का आरोप, वीकेएसयू प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल!

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आरा/आशुतोष पाण्डेय

आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के बी.एड विभाग में कथित तौर पर बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के नौ शिक्षकों की नियुक्ति किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

आरोप है कि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक जैसे शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन किया जाना आवश्यक है। ऐसे पदों पर नियुक्ति से पहले रिक्तियों का विधिवत विज्ञापन जारी कर योग्य अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर दिया जाता है। लेकिन आरोप है कि बी.एड विभाग में नौ शिक्षकों को कथित रूप से बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के नियुक्त कर लिया गया।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन ही जारी नहीं किया गया था, तो संबंधित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू की सूचना कब, कहां और किस माध्यम से मिली। ऐसे में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मामले को लेकर नियुक्ति में कथित आर्थिक लेन-देन के आरोप भी सामने आए हैं। चर्चा है कि प्रत्येक नियुक्ति के एवज में बड़ी रकम की मांग की गई और कुल 54 लाख रुपये के लेन-देन की बात कही जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इसमें से 27 लाख रुपये लिए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि वेतन मिलने के बाद लिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आर्थिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इनके संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक हुआ है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों से भी सवाल किए गए, लेकिन आरोपों पर तत्काल कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ सका। अब मांग उठ रही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे मामले में नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन, चयन समिति की प्रक्रिया, अभ्यर्थियों को दी गई सूचना, नियुक्ति आदेश और पदों की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करे।

विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है तो विश्वविद्यालय प्रशासन को तमाम सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं, यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल बी.एड विभाग में नौ शिक्षकों की कथित नियुक्ति का मामला विश्वविद्यालय की पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बहस का विषय बन गया है। अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। साथ ही, लगाए गए आर्थिक लेन-देन के आरोपों की सत्यता की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

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