स्वास्थ्य विभाग में अनियमितता का गंभीर आरोप, जनसुराज नेताओं ने की विभागीय प्रधान सचिव से शिकायत!

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रिपोर्ट – संतोष चौहान!

स्वास्थ्य विभाग मे जेनरेटर- भाड़ा घोटाला, जेनरेटर की कीमत से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों में वसूला जा रहा है भाड़ा, खेला जा रहा है करोड़ों का खेल

मेसर्स सिंह सर्विस नालंदा और मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना जेनरेटर का वसूलता है किराया : जनसुराज ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव कुमार रवि से की मुलाकात, रखी राज्यस्तरीय जांच की मांग

सुपौल में भी पहले बार-बार निविदा हुई रद्द,फिर संशोधन का खेल और अब चेहते कंपनी को मिला ठेका

सुपौल :- स्वास्थ्य विभाग में लूट मची हुई है, जिसे वर्षों से संस्थागत तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग में लूट का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में जेनरेटेट -भाड़ा घोटाला को जनसुराज की सुपौल इकाई ने उजागर किया है। पूरे बिहार में सिर्फ दो कंपनी जिला स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रूपए का जेनरेटर भाड़ा घोटाला को अंजाम दे रही है।घोटाले का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि जितना जनरेटर भाड़ा के नाम पर राशि कंपनी को दी जा रही है, उतने में विभाग कई जेनरेटर खरीद सकता है। खास बात तो यह है कि बिहार के करीब आधे दर्जन से अधिक जिलों में इन दोनों कंपनी ने कब्जा जमाकर रखा है और इन्हीं जिलों में ही करोड़ों का गबन हो रहा है। अब दोनों कंपनी ने सुपौल में भी भ्रष्ट पदाधिकारियों से मिलीभगत कर घोटाले की शुरुआत कर दी है।
इस मामले में खास बात यह है कि किसी जिले में अगर तीसरी कंपनी काम कर रही है तो इन दो कंपनी की तुलना में तीसरी कम्पनी आधे से भी कम राशि पर काम कर रही है। इन जगहों पर जेनरेटर के भाड़ा का कोई प्रावधान ही नहीं है। यानी जहाँ सिर्फ घंटा दर पर काम होना है वहां करोड़ों रुपये का गबन सिर्फ किराए के नाम पर किया जा रहा है। हालांकि मामला संज्ञान में आने के बाद जनसुराज ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की है। जनसुराज सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के जनता दरबार में प्रधान सचिव कुमार रवि से मिलकर उन्हें मामले से अवगत कराया है। उन्होंने मामले में राज्य स्तर पर कमेटी गठित कर जांच का आश्वासन दिया है। अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मेसर्स सिंह सर्विस नालंदा और मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना द्वारा करोड़ों का जनरेटर घोटाला किया जा रहा है। पहले टेंडर मैनेज किया जाता है, अगर टेंडर में कोई दूसरी कंपनी भाग ले तो उन्हें टेक्निकल बिड में बाहर कर दिया जाता है। चाहे टेंडर तीन तीन बार रद्द ही क्यों ना करना पड़े लेकिन काम अंतिम में इन दोनों कंपनी को ही मिलता है। इसके बाद किराया और मनमाने दर और बिल के नाम पर करोड़ों का बंदरबांट किया जाता है।

कटिहार,किशनगंज में जेनरेटर का भाड़ा नहीं तो पटना व अररिया में सिर्फ भाड़ा के नाम पर करोड़ों का भुगतान:

पिछले कुछ सालों से निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता बढ़ती जा रही है। खासकर मेसर्स सिंह सर्विसेज नालंदा एवं मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना के द्वारा स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य विभाग के पदाधिकारी की मिलीभगत से साजिश रच कर नियम कानून का उल्लंघन कर प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार के अधिकांश जिला जैसे सुपौल, अररिया, पटना, कैमूर, नालंदा, नवादा, खगड़िया, मुंगेर, गया आदि में आउटसोर्स के तहत जनरेटर द्वारा विद्युत आपूर्ति एवं अन्य सेवाएं प्रदान कर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का गबन किया जा रहा है। किराया का आंकलन करें तो जिला स्वास्थ्य समिति अररिया द्वारा 20 नवंबर 24 को मेसर्स सिंह सर्विसेज नालंदा से जनरेटर द्वारा विद्युत आपूर्ति हेतु दर का एकरारनामा के अनुसार 10 केवीए का भाड़ा 69 हजार प्रतिमाह, 20 केवीए का भाड़ा 72 हजार, 40 केवीए का भाड़ा 83 हजार, 50 केवीए का भाड़ा 92 हजार, 125 केवीए का 1 लाख 8 हजार, 200 केवीए का 1 लाख 50 हजार, 250 केवीए का 2 लाख 4 हजार, 400 केवीए का 2 लाख 45 हजार और 500 केवीए का 2 लाख 55 हजार प्रतिमाह भाड़ा दिया जा रहा है। इसी तरह पटना में भी 10 केवीए का भाड़ा 70 हजार प्रतिमाह, 15 केवीए 75 हजार, 20 केवीए का भाड़ा 80 हजार, 30 केवीए का भाड़ा 90 हजार, 50 केवीए का भाड़ा 1 लाख, 58.5 केवीए का 1 लाख 10 हजार, 100 केवीए का 1 लाख 40 हजार, 200 केवीए का 1 लाख 80 हजार, 320 केवीए का 2 लाख प्रतिमाह भाड़ा दिया जा रहा है। लेकिन कटिहार में तीसरी कंपनी को यह काम मिला है तो वहां किराया पूरी तरह शून्य है। सुपौल में भी इससे पूर्व किसी तरह का भाड़ा निर्धारित नहीं था। किशनगंज में भी भाड़ा के नाम पर एक भी रूपए का भुगतान नहीं होता है।

प्रति घंटा जनरेटर के दाम में भी बड़ा फर्क:

जेनरेटर से विद्युत आपूर्ति को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रति घंटा के हिसाब से दर निर्धारित किया गया है। लेकिन इसमें भी इन दो कंपनी को फायदा दिलाने के लिए जमकर अनियमितता बरती जा रही है। इस दर को लेकर इन दो कंपनी और अन्य कंपनी की तुलना करें तो इसमें भी आसमान धरती का फर्क है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कटिहार में तीसरी कंपनी के पास कम है। यहां 10 केवीए का 108 रूपए प्रति घंटा का भुगतान होता है तो पटना और अररिया में 220 से 280 रूपए प्रति घंटा तक भुगतान हो रहा है। इसी तरह 100 केवीए का कटिहार में 590 और 200 केवीए का 1200 रूपए प्रति घंटा तो पटना में 100 केवीए का 1750 और 200 केवीए का 4900 रूपए प्रति घंटा भुगतान किया जाता है।

सुपौल में पूर्व की कंपनी को नहीं मिलता था भाड़ा:

सरकार की राशि है की लूट है, लूट सके तो लूट। कुछ ऐसी ही स्थिति अब सुपौल स्वास्थ्य विभाग में है। जहां पहले की कंपनी जेनरेटर सेवा के एवज में एक भी रूपए भाड़ा नहीं दिया जाता था। वही अब मेसर्स सिंह सर्विसेज और मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना को सिर्फ भाड़ा के नाम पर हर महीने लाखों रूपए निर्धारित किया गया है। इससे पूर्व स्वास्थ्य विभाग में जेनरेटर का काम तीन कंपनी को दिया गया था जो फिलहाल 15 अगस्त तक काम करेगी। एकरारनामा में भाड़ा में एक भी रूपए का भुगतान नहीं होता था लेकिन अब मेसर्स सिंह सर्विसेज को काम मिला है। इसलिए भ्रष्ट पदाधिकारी भी मेहरबान है। नए दर को लेकर प्राप्त जानकारी के अनुसार 100 केवीए का 1 लाख 30 हजार, 200 केवीए का 1 लाख 75 हजार और 300 केवीए का 2 लाख 95 हजार सिर्फ भाड़ा निर्धारित किया गया है। जानकारों की मानें तो अगर सिर्फ भाड़ा एक साल का देखें तो इतने में नए जनरेटर की खरीदारी हो सकती है।

चेहते कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए हुआ बड़ा खेल, बार-बार हुआ टेंडर रद्द :

जिला स्वास्थ्य समिति सुपौल का काला कारनामा मेसर्स सिंह सर्विसेज नालंदा और मेसर्स कृष्ण कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना को नाजायज लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पहला निविदा 20 नवंबर 2025 को प्रकाशित किया गया। 26 नवंबर 25 को निविदा को रद्द कर दिया गया। पुनः 26 दिसंबर 2025 को निविदा का प्रकाशन किया गया और 24 जनवरी 2026 को संशोधन किया गया। 06 फरवरी 2026 को पुनः संसोधन किया गया। 7 मार्च 2026 को तकनीकी निविदा की मूल्यांकन हेतु बैठक किया गया और 17 मार्च 2024 को दूसरी बार निविदा को रद्द किया गया। फिर 18 मार्च 26 को निविदा का प्रकाशन किया गया और 7 मई 2026 को तकनीकी निविदा को मूल्यांकन हेतु निर्णय लिया गया। अंत में मेसर्स सिंह सर्विसेज नालंदा और मेसर्स कृष्ण कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना और मेसर्स विवेकानंद सिंह भागलपुर को सभी कार्य का आदेश दिया गया।

जनरेटर किराया घोटाले को लेकर प्रधान सचिव से मिले जनसुराज जिलाध्यक्ष:

स्वास्थ्य विभाग में जनरेटर किराया और निविदा प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर जनसुराज ने मोर्चा खोल दिया है। जनसुराज के सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने पटना में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव कुमार रवि से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुपौल समेत बिहार के कई जिलों में जनरेटर सेवा के नाम पर सरकारी राशि का बड़े पैमाने पर गबन किया जा रहा है। शिकायत में खास तौर पर दो कंपनियों को लाभ पहुंचाने और अलग-अलग जिलों में जनरेटर के किराए की दरों में भारी अंतर का मुद्दा उठाया गया। अनिल कुमार सिंह ने बताया कि सुपौल में पहले जनरेटर सेवा के लिए अलग से मासिक किराया निर्धारित नहीं था, लेकिन नई व्यवस्था में लाखों रुपये प्रतिमाह किराया दिए जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया को बार-बार रद्द और संशोधित कर मनपसंद एजेंसियों को काम देने का रास्ता बनाया गया। प्रधान सचिव कुमार रवि ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर पर जांच कमेटी गठित कर जांच कराने का आश्वासन दिया है।
वहरहाल जो भी हो पर आरोप-प्रत्यारोप के दौड़ में यह मामला बड़े पैमाने पर सोची-समझी साजिश प्रतीत नजर आ रही है। सरकार द्वारा निष्पक्ष जांच के बाद ही सही खुलासा हो पाएगा।

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