रिपोर्ट – संतोष तिवारी!
मुजफ्फरपुर में स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में आयोजित वार्षिक श्रावणी मेला का शुभारंभ रविवार को हुआ। इस समारोह का उद्घाटन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री तथा मुजफ्फरपुर के प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने डीएन हाई स्कूल परिसर में फीता काटकर किया। उद्घाटन समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
इस मेले का आयोजन हर साल भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए किया जाता है, जो बाबा गरीबनाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। उद्घाटन समारोह में डॉ. दिलीप जायसवाल ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और समाज की एकता का भी प्रतीक है।
श्रावणी मेले के सफल संचालन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी कुमार गौरव और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने मेले की व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने बाबा गरीबनाथ मंदिर से लेकर आरडीएस कॉलेज तक सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और पार्किंग व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए ताकि मेले के दौरान कोई भी अप्रिय घटना न हो।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए डीएन हाई स्कूल परिसर में एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। इस कंट्रोल रूम से मेले की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था, और भीड़ प्रबंधन पर लगातार नजर रखी जाएगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कंट्रोल रूम में सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों की एक टीम तैनात है, जो पूरे मेले की गतिविधियों की निगरानी करेगी।
उद्घाटन के मौके पर डॉ. दिलीप जायसवाल ने मुजफ्फरपुर में दो नए अंचल बनाने की घोषणा की। पहले मुजफ्फरपुर शहर का क्षेत्र मुशहरी अंचल में था, जिससे शहर के लोगों को कई कामों के लिए दूर जाकर मुशहरी जाना पड़ता था। अब नए अंचल के खुलने से स्थानीय निवासियों को कई सुविधाएँ मिलेंगी, जिससे उन्हें अपने दैनिक कार्यों के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
इस प्रकार, सावनी मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय विकास और प्रशासनिक सुविधाओं का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मेले श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करेगा, जहां वे अपनी आस्था को व्यक्त कर सकेंगे और स्थानीय संस्कृति का आनंद ले सकेंगे।
डॉ. दिलीप जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा, “हम सभी को मिलकर इस मेले को सफल बनाना है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा का ध्यान रखना है।




