क्या इलाज के नाम पर मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ हुआ? क्या बिल के दबाव में इंसानियत हार गई?

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा

मधुबनी के एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। एक महिला मरीज की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, अनावश्यक रूप से आईसीयू में रखने, पैसे का दबाव बनाने और बिल बढ़ाने के लिए मरीज की जान से खिलवाड़ करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है।

मामला 55 वर्षीय इंदु देवी से संबंधित है। परिजनों के अनुसार, 21 जुलाई को कमर के नीचे की हड्डी टूटने के बाद उन्हें इलाज के लिए अवतार हॉस्पिटल लायसंबंधित परिजनो का रोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने पहले उनका इलाज करने से इनकार कर दिया। बाद में मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया और 24 जुलाई को ऑपरेशन हुआ।

परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन सफल रहा और डॉक्टरों ने मरीज की हालत सामान्य बताई। उनका आरोप है कि जब मरीज की स्थिति ठीक थी, तब भी उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट नहीं किया गया। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने परिजनों को दवा लाने के लिए नीचे भेजा और कुछ ही मिनट बाद फोन कर बताया कि मरीज को हार्ट अटैक आया है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है।

परिजनों का आरोप है कि इसके बाद लगातार दवाइयां और बिल का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची। उनका यह भी कहना है कि पूरा भुगतान करने के बाद भी मरीज को समय पर डिस्चार्ज नहीं किया गया और अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बन गई।

परिजनों के अनुसार, अस्पताल से एंबुलेंस के जरिए दूसरे स्थान ले जाने के दौरान, अस्पताल से करीब दो किलोमीटर दूर पहूंचते ही इंदु देवी की मौत हो गई। आगे परिजनों का आरोप है कि बिल बढ़ाने के लिए अस्पताल ने जानबूझकर लापरवाही की, जिसके कारण उनकी जान चली गई।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि मरीज का इलाज चिकित्सकीय मानकों के अनुसार किया गया और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि परिजनों के आरोप सही हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और यदि आरोप गलत हैं, तो सच्चाई क्या है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही सामने आ सकेगा।

फिलहाल यह मामला गंभीर आरोपों और अस्पताल प्रबंधन के खंडन के बीच जांच का विषय है। हमारा उद्देश्य किसी पक्ष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की बात आपके सामने रखना है। इस मामले में आगे जो भी आधिकारिक कार्रवाई या जांच रिपोर्ट सामने आएगी, उसकी जानकारी भी हम आपको देंगे।

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