रिपोर्ट :- संतोष चौहान!
सुपौल :- डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए लोगों, खासकर विद्यार्थियों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को पी.एम. श्री +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुखपुर के सभागार में साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी सावन कुमार ने की। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों और उपस्थित लोगों को साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए सतर्क रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आज इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी लापरवाही किसी व्यक्ति की वर्षों की मेहनत की कमाई को पल भर में नुकसान पहुंचा सकती है।
डीएम ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर अपराधी अक्सर अनजान मोबाइल कॉल, फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट और विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन प्रलोभनों के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड का नंबर, सीवीवी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी कभी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर ऐसी जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं, क्योंकि कोई भी बैंक या सरकारी संस्था फोन पर इस प्रकार की गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।
उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपनी निजी जानकारी, फोटो या व्यक्तिगत दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और मोबाइल या कंप्यूटर में केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही एप्लीकेशन डाउनलोड करें। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में नियमित रूप से समझाते रहें।
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है या कोई संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई देती है तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से कई मामलों में ठगी गई राशि को वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि प्रत्येक नागरिक स्वयं सतर्क रहेगा और दूसरों को भी जागरूक करेगा तो साइबर अपराधों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दें और किसी भी अफवाह या फर्जी संदेश को बिना सत्यापन के आगे साझा न करें।
कार्यक्रम के दौरान साइबर थाना, सुपौल के अधिकारियों ने भी साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, लॉटरी का झांसा, सोशल मीडिया हैकिंग, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई फ्रॉड और फर्जी कस्टमर केयर नंबर के माध्यम से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इनसे बचने के लिए सतर्कता और सही जानकारी सबसे बड़ा हथियार है।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई और साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। अधिकारियों ने उनके सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह संदेश दिया गया कि तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और सावधानी के साथ किया जाए, ताकि साइबर अपराधियों के जाल से बचा जा सके।
इस अवसर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी-सह-बीपीआरओ, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सरवेश्वर सिंह, साइबर थाना सुपौल के पुलिस निरीक्षक शिव शंकर कुमार, सब इंस्पेक्टर महफूज आलम, विशाल कुमार, विद्यालय के प्रधानाध्यापक विश्वविजय कुमार, शिक्षक प्रणव कुमार सिंह सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक, कर्मी, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाना और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना था।




