रिपोर्ट :- संतोष चौहान
सुपौल :- जिले में कोशी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ व कटाव के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी कड़ी में सोमवार को अपर समाहर्ता-सह-आपदा प्रबंधन (एडीएम-डिजास्टर मैनेजमेंट) मो० तारिक एवं सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी (एडीएमओ) ने सुपौल अंचल के अति संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य संभावित बाढ़ और कटाव से पहले वास्तविक स्थिति का आकलन करना तथा संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना था।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की टीम ने सुपौल अंचल के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले बसबिट्टी गांव के निकट 64.95 किलोमीटर स्पर तथा मुंगरार क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। दोनों स्थान कोशी नदी में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में कटाव और तटबंधों पर दबाव की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अधिकारियों ने तटबंधों की मजबूती, स्परों की वर्तमान स्थिति, नदी के जलप्रवाह की दिशा, कटाव की संभावना तथा आसपास बसे गांवों की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान एडीएम मो० तारिक ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि बाढ़ सुरक्षा एवं कटाव निरोधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य करें तथा किसी भी संभावित आपदा से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में जियो बैग, बालू की बोरियां, बोल्डर सहित अन्य कटाव-रोधी सामग्रियों का पहले से भंडारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय एक छोटी सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए तटबंधों की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी कमजोर स्थान दिखाई दें, वहां तत्काल मरम्मत एवं सुरक्षा कार्य शुरू किए जाएं। उन्होंने संबंधित अभियंताओं को निर्देश दिया कि सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल जिला प्रशासन को सूचित करें।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से भी बातचीत कर नदी की वर्तमान स्थिति, पिछले वर्षों में हुए कटाव तथा संभावित खतरे की जानकारी प्राप्त की। ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा समय रहते निरीक्षण किए जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने की मांग की। अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
एडीएम (आपदा) ने कहा कि बाढ़ एवं कटाव से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन की विभिन्न टीमें लगातार नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति की निगरानी कर रही हैं। जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थलों पर चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था बनाए रखें। यदि कहीं भी कटाव की शुरुआत होती है तो तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएं। साथ ही स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ समन्वय बनाकर सूचना तंत्र को मजबूत रखने पर भी जोर दिया गया।
गौरतलब है कि नेपाल के तराई क्षेत्रों तथा बिहार के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण कोशी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सुपौल जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड में है। हाल के दिनों में कोशी बैराज से पानी के डिस्चार्ज में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते नदी किनारे बसे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन द्वारा तटबंधों की नियमित निगरानी, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण तथा कटाव निरोधी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
जिला प्रशासन का कहना है कि बाढ़ और कटाव से जुड़े सभी संभावित खतरों पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत एवं बचाव दलों को भी आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
प्रशासन का मानना है कि समय रहते की गई तैयारी और लगातार निगरानी के माध्यम से संभावित बाढ़ एवं कटाव से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से जिले के सभी संवेदनशील क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि आपदा की स्थिति उत्पन्न होने पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।




