कोशी नदी उफान पर: कोशी बराज से 1.72 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, तटीय इलाकों में बढ़ा खतरा!

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रिपोर्ट :- संतोष चौहान

नेपाल में लगातार हो रही बारिश से कोशी नदी का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन एलर्ट, निचले इलाकों के लोगों से सावधानी बरतने की अपील

सुपौल :- नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर अब बिहार में भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार दोपहर 4:00 बजे तक कोसी बराज से 1,72,435 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इससे पहले दोपहर 2:00 बजे बी.के.एस. (बराह क्षेत्र) में जलप्रवाह 1,08,600 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कोशी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
कोशी बराज से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार सोमवार दोपहर 4:00 बजे डाउन स्ट्रीम डिस्चार्ज 1,72,435 क्यूसेक रहा। वहीं पूर्वी कोसी मुख्य नहर और पश्चिमी कोसी मुख्य नहर में पानी का प्रवाह शून्य रहा। यानी पूरा पानी सीधे नदी के मुख्य प्रवाह के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। इससे कोशी नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कोशी नदी में पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। बरसात के मौसम में कोशी का जलस्तर बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन लगातार बढ़ते डिस्चार्ज ने तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने भी स्थिति पर लगातार निगरानी शुरू कर दी है और जल संसाधन विभाग के अधिकारी हर घंटे नदी के जलस्तर और बराज से छोड़े जा रहे पानी की समीक्षा कर रहे हैं।
कोशी नदी के किनारे बसे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया और खगड़िया जिले के कई गांवों में लोग सतर्क हो गए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीण नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। कई स्थानों पर लोग अपने मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं।
जल संसाधन विभाग के अनुसार फिलहाल तटबंध सुरक्षित हैं, लेकिन सभी संवेदनशील स्थलों पर अभियंताओं और कर्मियों की तैनाती की गई है। कटाव संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। तटबंधों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है और किसी भी प्रकार की क्षति की सूचना मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अनावश्यक रूप से नदी के पास नहीं जाने और अफवाहों से बचने की अपील की है। मछुआरों को नदी में नाव लेकर नहीं उतरने तथा बच्चों को नदी के किनारे खेलने से रोकने की सलाह दी गई है। साथ ही स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड में रखा गया है।
कोशी नदी को बिहार का “शोक” कहा जाता है क्योंकि अतीत में इस नदी ने कई बार भीषण बाढ़ और कटाव से व्यापक तबाही मचाई है। हर वर्ष मानसून के दौरान नेपाल में होने वाली बारिश का सीधा असर उत्तर बिहार के कोशी क्षेत्र में देखने को मिलता है। यही कारण है कि जलस्तर बढ़ते ही प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो जाता है।
हाल के दिनों में सुपौल जिले के कई तटीय इलाकों में कटाव की घटनाएं भी सामने आई हैं। लालगंज सहित कई गांवों में नदी का दबाव बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। यदि नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में कोशी का जलस्तर और बढ़ सकता है, जिससे निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ने की आशंका है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। नाव, राहत सामग्री, दवाइयों तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। स्वास्थ्य विभाग को भी संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन कोशी नदी के बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। तटवर्ती इलाकों के लोगों से लगातार सावधानी बरतने, प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की गई है। आने वाले दिनों में नेपाल में होने वाली बारिश और बराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर ही कोशी क्षेत्र की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।

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