जहानाबाद -हत्या के चर्चित मामले में सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास, परिजनो में मची खलबली!

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रिपोर्ट – पंकज कुमार

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, जहानाबाद के न्यायालय ने सत्र वाद संख्या-205/2022, जो हुलासगंज थाना कांड संख्या-37/2020, दिनांक 20.02.2020, धारा 302/34 भारतीय दंड संहिता एवं 27 आर्म्स एक्ट से संबंधित है, में सभी अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार, इस मामले के सूचक नवीन कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनका परिवार रांची (झारखंड) में निवास करता है। दिनांक 20 फरवरी 2020 को उनके बड़े भाई अनिल कुमार अपने पैतृक गाँव बनवरिया गए हुए थे। उसी दौरान गेहूँ काटने के विवाद को लेकर अमरेश कुमार ,भेड़ा सिंह अपने अन्य सहयोगियों के साथ हथियारों से लैस होकर वहाँ पहुँचा और विवाद के क्रम में अनिल कुमार के सिर में गोली मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर घटनास्थल पर गिर पड़े।
घटना के समय मृतक के चालक विजय कुमार प्रसाद भी मौके पर मौजूद थे। अभियोजन के अनुसार, अभियुक्तों ने चालक को भी हथियार के बल पर अपने कब्जे में लेकर उसके साथ मारपीट की। बाद में वह किसी तरह जान बचाकर वहाँ से निकला और घटना की सूचना पुलिस को दी। इस बीच ग्रामीणों की सहायता से घायल अनिल कुमार को हुलासगंज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अनुसंधान पूर्ण कर आरोप-पत्र न्यायालय में समर्पित किया। दिनांक 26.05.2022 को न्यायालय द्वारा आरोप का गठन किया गया, जिसके बाद मुकदमे का विधिवत विचारण प्रारंभ हुआ। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी सहित अन्य गवाहों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। विशेष रूप से प्रत्यक्षदर्शी विजय कुमार प्रसाद की गवाही तथा अन्य साक्ष्यों ने अभियोजन के मामले की पुष्टि की।
न्यायालय ने अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों तथा उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के उपरांत यह पाया कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा। फलस्वरूप न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए धारा 302/34 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा आर्म्स एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत भी दंडित किया।
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी लोक अभियोजक शारदानंद कुमार द्वारा की गई, जिनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं विधिक तर्कों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा।

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