रिपोर्ट – संतोष कुमार पांडेय!
तू सुरक्षा कर मैं सेंध लगाऊं… तू डाल डाल मैं पात पात.. दर असल नीट परीक्षा में ज़ब पेपर लीक नहीं करा सके बदमाश तो मुन्ना भाई को बिठाकर परीक्षा प्रक्रिया में सेंध लगाने का किया प्रयास, लेकिन इस बार पुलिस प्रशासन ने उनकी एक नहीं चलने दी, और गिरोह का खुलासा करते हुये कई बदमाशों को दबोच लिया!
ये खबर बिहार के लखीसराय से है जहाँ NEET UG पुनर्परीक्षा 2026 में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों समेत फर्जी परीक्षार्थियों, मूल अभ्यर्थियों, सहयोगियों और बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी आधार कार्ड, डमी कैंडिडेट और परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने के संगठित नेटवर्क की बात सामने आई है। पुलिस अब इस गिरोह के तार कई राज्यों तक खंगाल रही है।
एसपी प्रेरणा कुमार ने बताया कि 21 जून को आयोजित NEET UG पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों से बड़े पैमाने पर परीक्षा फर्जीवाड़े का मामला सामने आया। सूचना मिलने पर केंद्राधीक्षकों, फ्लाइंग स्क्वॉड, स्टैटिक टीम और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त जांच शुरू की।जांच के दौरान केंद्रीय विद्यालय, केआरके उच्च विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर सहित विभिन्न केंद्रों से संदिग्ध नौ अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन में खुलासा हुआ कि कई अभ्यर्थी वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर बैठकर परीक्षा दे रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने के लिए फर्जी आधार कार्ड तैयार किए गए थे। आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी कुछ कर्मियों की मिलीभगत से इन लोगों को प्रवेश दिलाया गया। गिरफ्तार फर्जी परीक्षार्थियों में मधेपुरा निवासी एमबीबीएस छात्र मंतोष कुमार, मुजफ्फरपुर निवासी मेडिकल छात्र विवेक कुमार, सुपौल निवासी मेडिकल छात्र हिमांशु कुमार, मधुबनी निवासी सौरभ जौझा, बीएचयू की छात्रा पूनम कुमारी, दिल्ली के मेडिकल छात्र अमन अग्रवाल, रौशन कुमार, झारखंड निवासी चंचल कुमारी तथा राजस्थान निवासी मेडिकल छात्र जितेन्द्र कुमार शामिल हैं।
पुलिस ने इन आरोपियों की निशानदेही पर मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार तथा सहयोगी अर्पित सिंह और रंजीत कुमार को भी गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच के दायरे में बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कई कर्मी भी आए हैं। पुलिस ने बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुंद कुमार, उदय कुमार, मयंक कश्यप, विशाल कुमार, राकेश कुमार, मोहित कुमार, सुदर्शन कुमार, अमलेश कुमार, आदिति कुमारी, धनश्याम कुमार, शंकर कुमार, आर्यन कुमार और चंदन कुमार समेत कुल 18 बायोमेट्रिक कर्मियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह मामला केवल प्रतिरूपण यानी इम्पर्सनेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत की भी आशंका है। प्रारंभिक जांच में बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक नेटवर्क के तार जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पूरे मामले में किउल थाना कांड संख्या 64/26 तथा कवैया थाना कांड संख्या 244/26 और 245/26 दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और पुलिस इस सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।




