रिपोर्ट : संतोष चौहान!
डीजीपी को मिली शिकायत पर एसपी ने त्रि-सदस्यीय जांच समिति बनाई। रिपोर्ट में सामने आया कि जब्त कफ सिरप के अलावा गाड़ियों की बैट्री और पार्ट्स भी चोरी हुई है। गिरफ्तार एक चौकीदार ने स्वीकारोक्ति दी है। बताया कि चारों कर्मी आपस में पैसा बांटते थे।
सुपौल जिले के प्रतापगंज थाने से एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली खबर सामने आया है। जहां थाना परिसर से ही जब्त सामान चोरी के आरोप में चार पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यहां, खुद कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे। दरअसल, विगत कई महीनों से पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से थाने के मालखाने में जमा प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप को नशे के आदी ग्राहकों को चोरी-छिपे बेचा जा रहा था। मामले की गुप्त शिकायत डीजीपी से होने के बाद सुपौल एसपी द्वारा गठित विशेष त्रि-सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में यह गड़बड़झाला उजागर हुआ है। इसके बाद तत्काल प्रभाव से प्रतापगंज थानाध्यक्ष पुअनि धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मामले में संलिप्त चार अन्य पुलिसकर्मियों एक चौकीदार राहुल कुमार, अग्निशमन सिपाही रंजन राज व चालक मनीष कुमार और डायल 112 का चालक अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है। हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने काफी गोपनीयता बरती।

6162 बोतल कफ सिरप मालखाने से गायब
प्रतापगंज थाने में जारी अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सुपौल की अध्यक्षता में एक त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इसमें वीरपुर एसडीपीओ सुरेन्द्र कुमार और पुलिस उपाधीक्षक (साइबर) सुपौल गौरव गुप्ता शामिल थे। 11 जून को सौंपी गई संयुक्त जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए हैं। कांड संख्या-216/25 में कुल 7560 बोतल कोडीन कफ सिरप जब्त किया गया था। अनुसंधानकर्ता द्वारा 8 बोतल एफएसएल जांच के लिए भेजने के बाद मालखाने में 7552 बोतलें होनी चाहिए थीं, लेकिन मौके पर मात्र 1390 बोतलें ही पाई गईं। यानी 6162 बोतल कफ सिरप गायब कर बेच दिया गया।
पकड़े जाने के डर से बदला स्टॉक
गायब स्टॉक को छुपाने के लिए मालखाने में 2842 बोतलें ऐसी रखी पाई गईं, जो साल 2026 की निर्मित थीं। यह स्टॉक जब्ती सूची में दर्ज ब्रांड और बैच नंबर से बिल्कुल अलग था, जिससे साफ है कि हेरफेर छिपाने के लिए नया माल रखा गया था। जांच में पाया गया कि थानाध्यक्ष द्वारा पूर्व में जब्त किए गए ट्रैक्टर का डायनमो, टायर और बैट्री एवं एक टोटो की बैट्री बेच दी गई। पूछने पर थानाध्यक्ष ने इस संबंध में पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की। 06 मई को लूट कांड से जुड़ी एक अपाचे बाइक थाना लाने के बावजूद थानाध्यक्ष द्वारा उसे छोड़ दिया गया। थानाध्यक्ष पर कांड के शमन का आरोप सत्य पाया गया है और उनके अभिलेख संधारण में गंभीर त्रुटियां मिली हैं।
पकड़े जाने के डर से सीसीटीवी फुटेज किया डिलीट
जब जांच समिति ने थाने के सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की, तो पता चला कि थाना परिसर के मुख्य कैमरे का 28 मई से पहले का सारा फुटेज डिलीट कर दिया गया है, ताकि कोई सबूत हाथ न लगे। जांच समिति द्वारा थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार के इस कृत्य को घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण का परिचायक मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र सुपौल तय किया गया है। इधर, सोमवार रात गिरफ्तार किए गए चार कर्मियों को पहले करजाईन थाने में रखा गया और फिर जेल भेजा गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच में स्थानीय थानाध्यक्ष के साथ प्रतापगंज थाने के एएसआई और एसआई स्तर के पुलिसकर्मियों के ऊपर भी मामला दर्ज करने का आदेश था। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर मामले की गहराई से कार्रवाई करने के बजाय इसे दबाने और लीपापोती करने का प्रयास तेज है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
चौकीदार ने की थी लाइजनिंग, ऐसे बेचता था जब्त माल
दिसंबर 2023 में अनुकंपा पर नियुक्त चौकीदार राहुल ने प्रतापगंज अपर थानाध्यक्ष पूनम कुमारी के समक्ष दर्ज स्वीकारोक्ति में बताया है कि ड्यूटी के दौरान ही उसका परिचय त्रिवेणीगंज निवासी आशीष से हुआ, जिसने कफ सिरप और देसी शराब बिक्री का ऑफर दिया था। 13 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने पिकअप में कफ सिरप जब्त किया था। राहुल ने अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल 112 के चालक अखिलेश कुमार को आशीष के हाथों माल बेचने के लिए तैयार किया। थानाध्यक्ष अपनी बहन की शादी में छुट्टी पर गए तो नियमित रात करीब 12 बजे कफ सिरप निकालना और आशीष को सप्लाई शुरु किया। थानाध्यक्ष के लौटने पर बात खुली तो राहुल ने आशीष से बेचा हुआ माल वापस मांगा। लेकिन, उसने 2026 में निर्मित अलग कंपनी और बैच का 2842 बोतल कफ सिरप देते हुए यह कह दिया कि माल सप्लाई हो चुका है। नौकरी बचाने के लिए चौकीदार ने मौका मिलते ही अन्य सहयोगियों के साथ मिल कर वह सिरप उसी पिकअप पर रख दिया। लेकिन, जांच में इसका भी खुलासा हो गया। इसके अलावा चौकीदार ने माना है कि वह पूर्व में भी थाना में जब्त देसी शराब और कफ सिरप के अलावा जब्त बाइक व टोटो के बैट्री व पार्ट्स चुराकर बेचता था। इसका पैसा चारों आपस में बांटते थे।
एनडीपीएस और चोरी की धाराओं में केस
एसपी शरथ आरएस ने बताया कि शिकायत सामने आते ही त्रि-सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच कराई गई। प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर थानाध्यक्ष को निलंबित किया गया है। साथ ही एनडीपीएस और चोरी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी की गई है। आगे केस के अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।




