मानवाधिकार आयोग ने दिया पानापुर करियात थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष पर 24 घंटे में प्राथमिकी का आदेश!

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रिपोर्ट – संतोष तिवारी!

मामला थाना लॉक-अप में युवक की पिटाई करने का!

प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप!

बुरे फंसे तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद!

पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा के माध्यम से एनएचआरसी और बीएचआरसी में दायर की थी याचिका!

एनएचआरसी ने मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसएसपी मुजफ्फरपुर को जारी किया कारण बताओ नोटिस!

मुजफ्फरपुर :- जिले के पानापुर करियात थाने की पुलिस द्वारा लॉक-अप में बंद कर युवक की बेरहमी से पिटाई के मामले में मानवाधिकार आयोग ने एक्शन लेते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद के विरुद्ध 24 घंटे में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया हैं। साथ-ही-साथ माननीय आयोग द्वारा बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसएसपी मुजफ्फरपुर को कारण बताओ नोटिस भी दिया गया है। विदित हो कि सरैया थाना क्षेत्र के बहिलवारा रुपनाथ निवासी अमन कुमार नामक युवक को 11 मार्च 2025 को सुबह करीब 3 बजे पानापुर करियात थाने के थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद द्वारा गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया गया था, जिसकी जानकारी मिलने पर अमन कुमार के बहनोई रौशन प्रताप सिंह अपने साला अमन कुमार से मिलने थाना पहुँचे थे, जहाँ पुलिस ने अमन कुमार को बंद कर रखा था। उसके बाद थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद ने अमन कुमार को छोड़ने के एवज में जीजा रौशन प्रताप सिंह से एक लाख रुपये की माँग की थी और जब रौशन प्रताप सिंह ने इसका विरोध किया था तो आवेश में आकर थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद ने उन्हें भी हाजत में बंद कर दिया था और उनका मुँह, हाथ तथा पैर बाँधकर उनके साथ काफी बेरहमी से मार-पीट की गई थी। जब परिवार के अन्य सदस्य पहुँचे और दोनों को छोड़ने का आग्रह किया तो थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद ने एक लाख रुपये की माँग रखी तथा 70 हजार रुपये लेने के बाद दोनों को छोड़ा गया। रौशन प्रताप सिंह की अपाचे मोटरसाइकिल को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया, जिसे लौटाने के एवज में 30 हजार रुपये की माँग अलग से की। विदित हो कि मार-पीट में गंभीर रूप से घायल रौशन प्रताप सिंह को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काँटी ले जाया गया था, जहाँ से बेहतर ईलाज हेतु उन्हें एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया था। इसके बाद मामला एनएचआरसी और बीएचआरसी के समक्ष पहुँचा। आयोग ने इसे मानवाधिकार का घोर उल्लंघन मानते हुए बिहार के मुख्य सचिव से पूछा है कि पीड़ित को क्यों नहीं एक लाख रूपये का मुआवजा दिया जाये। साथ-ही-साथ थानाध्यक्ष के विरुद्ध अबतक प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गयी, इसपर भी आयोग के द्वारा नाराजगी जाहिर की गयी है। उसके बाद आनन-फानन में पानापुर करियात थाना के थानाध्यक्ष द्वारा रविवार को रौशन प्रताप सिंह की माँ वीणा सिंह के नाम एक नोटिस जारी किया गया और 24 घंटे के अंदर थाना पर उपस्थित होकर आवेदन देने को कहा गया। रविवार के शाम में ही वीणा सिंह के द्वारा पानापुर करियात थाना में तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने हेतु आवेदन दिया गया। मामले के सम्बन्ध में मानवाधिकार मामलों के जानकार अधिवक्ता एस.के.झा ने बताया कि यह मामला सरकार की व्यवस्था का पोल खोल रही है। कारण कि एक प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पीड़ित परिवार को पटना से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ी है। फिलहाल यह मामला एनएचआरसी और बीएचआरसी में चल रहा है। दोनों आयोगों के स्तर से पीड़ित परिवार को न्याय अवश्य मिलेगा, मुझे आयोग पर पूरा भरोसा है।

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