रिपोर्ट – आशुतोष पाण्डेय!
आरा। भोजपुरी भाषी क्षेत्र की पारंपरिक लोककला पिड़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हो गया है। इससे इस विशिष्ट लोकचित्रकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और स्थानीय कलाकारों के लिए रोजगार व आय के नए अवसर सृजित होंगे।
सर्जना न्यास के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ चित्रकार संजीव सिन्हा ने बताया कि GI टैग प्राप्त करने के लिए पिछले वर्ष आवेदन किया गया था। विभिन्न स्तरों पर जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सफलता मिली है।
उन्होंने कहा कि GI टैग मिलने से बिहार की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा तथा हजारों कलाकारों की आजीविका को नया आधार प्राप्त होगा। इस प्रक्रिया में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह, पूर्व जिला विकास प्रबंधक रंजीत सिन्हा तथा Human Welfare Association के महासचिव डॉ. रजनीकांत का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार GI टैग उत्पाद की विशिष्टता, गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। यह उपलब्धि बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक कला के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




