रिपोर्ट – संतोष तिवारी!
जिस इलेक्ट्रिक व्हीकल का उत्पादन ही नहीं हुआ उसका हो गया रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस, उपभोक्ता परेशान!
ओला इलेक्ट्रिक बाइक का भयंकर फर्जीवाड़ा आया सामने!
पीड़ित ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा के माध्यम से परिवहन विभाग के प्रधान सचिव को भेजा नोटिस!
मुजफ्फरपुर :- जिले में इलेक्ट्रिक वाहन खरीद को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। जिस इलेक्ट्रिक व्हीकल का कंपनी के द्वारा निर्माण ही नहीं किया गया है, उसका रजिस्ट्रेशन और बीमा भी जारी कर दिया गया है। काँटी थाना क्षेत्र के छपरा गाँव निवासी नवीन कुमार सिंह ने ओला इलेक्ट्रिक बाइक 3 अप्रैल को ही गोबरसही स्थित एजेंसी से बुक कराये थे, एजेंसी वालों के द्वारा उनके बाइक के मद में लोन भी जारी करवा दिया गया, लेकिन आज तक उपभोक्ता को ओला बाइक मिली ही नहीं, एजेंसी वाले के द्वारा बताया गया कि उक्त व्हीकल का अभी तक उत्पादन ही नहीं हुआ है!
उपभोक्ता का आरोप है कि ओला की इलेक्ट्रिक बाइक की डिलीवरी से पहले ही उसका रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस नंबर अलॉट कर दिया गया। करीब एक लाख दस हजार रुपये की बाइक अब तक नहीं मिलने पर पीड़ित ने अपने अधिवक्ता एस.के.झा के माध्यम से जिला परिवहन पदाधिकारी मुजफ्फरपुर, प्रधान सचिव, परिवहन विभाग और ओला के गोबरसही स्थित एजेंसी को लीगल नोटिस भेजा है।
पीड़ित उपभोक्ता का आरोप है कि एजेंसी की ओर से एक सप्ताह में बाइक डिलीवरी का भरोसा दिया गया था। बाद में 18 अप्रैल की तारीख दी गई, लेकिन तय समय पर भी गाड़ी नहीं मिली। कई बार संपर्क करने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिलता रहा।
हैरानी की बात यह है कि 7 अप्रैल को ही बाइक का इंश्योरेंस और रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। इतना ही नहीं, वाहन नंबर BR06EK-6991 भी अलॉट हो गया, जबकि बाइक अब तक ग्राहक को नहीं सौंपी गई है। इसके बाद पीड़ित ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा से संपर्क किया। अधिवक्ता ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए परिवहन विभाग और कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए है। अधिवक्ता का आरोप है कि कई कंपनियां ग्राहकों से पैसे लेने के बाद वाहन तैयार होने से पहले ही इंश्योरेंस और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करा देती है। उन्होंने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जायेगा। मुजफ्फरपुर में सामने आया यह मामला इलेक्ट्रिक वाहन खरीद प्रक्रिया और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग और कंपनी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।



