पटना फ्रंटियर के डीआईजी का 48 वीं वाहिनी मुख्यालय का दौरा, जवानों को किया सम्मानित!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा

मधुबनी जिले के जयनगर भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा स्थित एसएसबी मुख्यालय में आज पटना फ्रंटियर के डीआईजी रंजीत पहूंचे। जहाँ पहूंचने पर एसएसबी 48 वीं बटालियन मुख्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कमांडेंट राजेन्द्र कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी और जवान उपस्थित रहे। मुख्यालय पहुंचने पर डीआईजी ने अधिकारियों एवं जवानों के साथ एक समीक्षा बैठक की जिसमें सीमा सुरक्षा, आपसी समन्वय और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। डीआईजी रंजीत कुमार ने कहा कि भारत- नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जवानों की सतर्कता व समर्पण के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों के समर्पित कार्य की खुले तौर पर सराहना किए। सीमाओं की सुरक्षा के प्रति जवानों की जिम्मेदारी को महत्व बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में सतर्क रहना और अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान 48 वीं बटालियन के एक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवान को डीआईजी ने सम्मानित किया है। इस मौके पर डीआईजी ने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित भी किया। बैठक में डीआईजी ने आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी दक्षता, सतत प्रशिक्षण और बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सीमा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण, उपकरणों का उन्नयन और सीमा पर तैनात विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है। आगे डीआईजी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती अवैध गतिविधियों, तस्करी एवं अन्य अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में नोडल अधिकारियों को सीमावर्ती निगरानी बढ़ाने, गश्त तंत्र को सक्रिय करने और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर जागरूकता बढ़ाने के सुझाव दिए गए। साथ ही उन्होंने खेतों और आबादी के नज़दीक के इलाकों में निगरानी के तरीकों को मजबूत करने पर बल दिया ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा सके। अंत में डीआईजी रंजीत कुमार ने कमांडेंट राजेंद्र कुमार और सभी अधिकारियों से कहा कि वे जवानों के मनोबल को बनाए रखें तथा उपलब्ध संसाधनों का सर्वश्रेष्ठ उपयोग सुनिश्चित करें। निरीक्षण के दौरान मुख्यालय की सुविधाओं, गश्त योजनाओं और निगरानी प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की गई, ताकि सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक तेज तथा प्रभावी बनाया जा सके।

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