रिपोर्ट- आदित्यानंद आर्य!
सीतामढ़ी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने सोमवार को पुपरी पुलिस इंस्पेक्टर कार्यालय में तैनात रीडर गोविन्द कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर केस के सुपरविजन रिपोर्ट को वादी के पक्ष में करने तथा प्राथमिकी से धारा हटाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, मामला बोखड़ा थाना क्षेत्र के पतनुका गांव से जुड़ा है। गांव निवासी अशर्फी ठाकुर के बयान पर दर्ज प्राथमिकी में दरबारी ठाकुर एवं उनके दो पुत्रों को नामजद आरोपी बनाया गया था। वहीं दूसरी ओर दरबारी ठाकुर की पत्नी रामो देवी ने भी अशर्फी ठाकुर समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कराया था। आरोप है कि मामले के पर्यवेक्षण के दौरान प्राथमिकी से धारा 110 हटाने और एक नाबालिग का नाम निकालने के एवज में रीडर गोविन्द कुमार ने 35 हजार रुपये की मांग की थी। वादी द्वारा असमर्थता जताने पर सौदा 20 हजार रुपये में तय हुआ। इसके बाद अशर्फी ठाकुर ने पटना स्थित निगरानी विभाग से शिकायत कर दी। शिकायत की सत्यता जांचने के बाद निगरानी विभाग ने विशेष टीम का गठन किया। सोमवार सुबह डीएसपी कृपालचंद्र जायसवाल और डीएसपी श्याम प्रसाद के नेतृत्व में टीम पुपरी पहुंची और सादे लिबास में कार्यालय के आसपास निगरानी शुरू कर दी। जैसे ही वादी ने कार्यालय के अंदर केमिकल युक्त नोटों की गड्डी आरोपी रीडर को सौंपी, टीम ने तत्काल छापेमारी कर उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के हाथ धुलवाए गए, जिसमें केमिकल के कारण हाथों का रंग बदल गया। इसे रिश्वत लेने का पुख्ता सबूत माना गया। कार्रवाई के दौरान इंस्पेक्टर कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निगरानी टीम आरोपी को हिरासत में लेकर स्थानीय थाना पहुंची, जहां आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच पटना ले जाया गया, जहां विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा। पुपरी रेंज के सर्किल इंस्पेक्टर अविनाश चंद्रा ने बताया कि गिरफ्तारी के समय वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ है और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




