मोक्ष और कल्याण के लिए श्री मद्भागवत कथा सर्वोत्तम -आचार्य धर्मेन्द्र!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार!


बक्सर। स्वामी जी महाराज के कृपापात्र विश्वाचार्य ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने धर्मावती नदी तट अवस्थित भरियार में आयोजित मां काली प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव यज्ञ अन्तर्गत श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में नैमिष शारण्य में सौनकमुनि और सुत संवाद को विस्तार देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत वेद का सार व सत्यं शिवम् सुन्दरं जीवन का संविधान हैं। आचार्य जी ने कहा कि मानव जीवन का लक्ष्य नारायण का साक्षात्कार है। मानव जीवन का लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है। आचार्य जी ने बताया कि कलयुगी जीवों के मोक्ष और कल्याण का सरल पर सर्वोच्च साधन श्रीमद्भागवत कथा है। यह कथा देवताओं के लिए दुर्लभ है।यह कथा साधन से नहीं ,वरन् गुरु गोविंद की कृपा से मिलती है। आचार्य जी ने कहा कि नारायण सतयुग में गरूड़ के पीठ पर, त्रेता में हनुमान जी के कंधे पर, द्वापर में रथ पर और कलयुग में संतों के श्री मुख से निकली कथा में आते हैं और कानों से हृदय में गोविंद आसन लगाते हैं। कृपालु नारायण हरि भक्तों के कल्याण के लिए, पृथ्वी के भार को हल्का करने आदि के लिए विविध समयों में विविध रूपों में पधारते हैं। भगवान नारायण के 24अवतारों की सूत्रवत दिव्य कथा को आचार्य जी ने कही। कपिल नारायण की कथा विस्तार देते हुए देवहूति के पावन चरित्र से गृहस्थी को सीखने की सलाह दी। इसी क्रम दातात्रेय अवतरण कथा कहते माता अनसूया का दिव्य चरित्र का प्रतिपादन करते कहा कि पतिब्रता स्त्रियां कुछ भी कर सकती हैं,उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं। भगवान के 24अवतारों की कथा कहते हुए कहा कि भगवान सर्वसमर्थ हैं , भक्तों की मनोकामना और समय की जरूरत के अनुसार स्वरुप धारण कर लेते हैं । भगवान के सभी अवतरण कल्याणकारी , मंगलकारी है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से दूर-दूर के गांव से स्त्री पुरुष टोली बनाकर अरहे है। कथा के मध्य में गायन से भक्त झूम रहे हैं।पैड पर पं मनोज तिवारी,नाल पर मुन्ना जी, हारमोनियम पर अजय बाबा संगत कर रहे हैं। यज्ञशाला का कार्य पं शिवजी बाबा की सन्निधि में वाराणसी से पधारे आचार्य संभाल रहे हैं।

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