रिपोर्ट अनमोल कुमार
रांची। डॉ रामजी यादव,संस्थापक अध्यक्ष सह प्रति कुलपति का सकारात्मक सोच, आगे बढ़ने की जज्बा, पिता परमेश्वर, पिता ही परमेश्वर, कर्म ही धर्म, अलग हटकर पहचान बनाने का जुनून, जनहित सेवा ने इन्हें 5 गायों वाली खटाल से मां के नाम से निर्मित कलावती अस्पताल से लेकर वाई बी एन विश्वविद्यालय तक का सफ़र 2017-2026 तक में पूरा किया।
एक साक्षात्कार में इन्होंने कहा कि जब तक सांस रहेगी, तबतक शिक्षा जगत में नया कीर्तिमान हासिल करूँगा। उन्होंने कहा कि निर्धन बच्चों के लिए जल्द ही आचार्य कुल की स्थापना कर रहा हूँ। अभी 1200 कर्मचारियों को ढेर करोड़ का वेतन प्रति माह भुगतान करता हूँ। 14 महाविद्यालय और 16 विद्यालय भी संचालित कर रहा हूँ। उत्तर प्रदेश बागी बलिया का यह सपूत झारखंड में झण्डा गाड़ रखा है। पिता बैजनाथ यादव के प्रेरणा से आज वाई बी एन विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ( यू जी सी)से संबद्ध, झारखंड सरकार से मान्यता प्राप्त, इण्डियन नर्सिंग कांसिल ( आई एन सी ) , एसोसिएशन ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से संबद्ध, फार्मेसी काॅसिल ऑफ इंडिया ( पी सी आई ) , आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, नेशनल कांसिल फाॅर टीचर एडुकेशन और बार कान्सिल ऑफ इंडिया से संबद्ध और मान्यता प्राप्त है जहाँ विविध कोषांगो़ का गठन और संचालन किया जा रहा है। यहाँ मैनजमेंट, पी एच डी ( शोध ), नर्सिंग ट्रेनिंग ( ए एन एम / जी एन एम), फार्मेसी ( डी फर्मा, बी फर्मा, एम फर्मा, एफ डी फर्मा, पीएचडी), बीएड, डी ई आई ईडी पीएचडी), कृषि, उद्यान और पशुपालन में ( बी एस सी / एम एस सी / पीएचडी), विधि शाखा में ( बी बी ए /एल एल बी /एल एल एम) समेत कई पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है। सैकड़ो एकड़ में फैला वाई बी एन विश्वविद्यालय झारखंड के आकर्षण का केन्द्र है।



