आलेख –अनमोल कुमार!
बाबू वीर कुंवर सिंह :-
जन्म: 23 अप्रैल 1778, जगदीशपुर, भोजपुर, बिहार
पुण्यतिथि : 26 अप्रैल 1858, जगदीशपुर
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के “बिहार केसरी”। 80 साल की उम्र में जब हाथ में तलवार उठाई, तो अंग्रेज अफसर बोले – “ये बूढ़ा शेर है, इसे काबू करना मुश्किल है।”
80 साल में जवान – कुंवर सिंह की 4 बड़ी लड़ाइयाँ
तारीख जगह क्या किया नतीजा :-
25 जुलाई 1857 : आरा दानापुर के बागी सिपाहियों के साथ आरा पर कब्जा। अंग्रेजों को 3 हफ्ते घेरे रखा। “आरा की घेराबंदी” – 1857 की सबसे मशहूर लड़ाई।
अगस्त 1857 : जगदीशपुर से निकलना अंग्रेजों ने घर-महल तोड़ा। कुंवर सिंह ने कहा – “महल गया तो क्या, मिट्टी तो अपनी है।” गुरिल्ला युद्ध शुरू। पूरे शाहाबाद में क्रांति।
मार्च 1858 : आजमगढ़, उत्तर प्रदेश 500 किमी पैदल चलकर आजमगढ़ जीत लिया। अंग्रेज जनरल मिलमैन को हराया। अंग्रेजी हुकूमत हिल गई। लंदन तक खबर गई।
23 अप्रैल 1858 : जगदीशपुर वापसी गंगा पार करते समय अंग्रेजों की गोली से हाथ जख्मी। खुद तलवार से हाथ काटकर गंगा में प्रवाहित किया: “ये हाथ अब अंग्रेज को न लगे। माँ, तेरा कर्ज चुकाया।” 26 अप्रैल को वीरगति। पर जगदीशपुर आजाद कराकर मरे।
कमाल : 80 साल उम्र, 1 हाथ कटा, फिर भी आखिरी सांस तक लड़ते रहे। अंग्रेज डगलस ने लिखा – “He was the most formidable opponent in Bihar.”
मिट्टी से मोह : – महल टूटा तो बोले “धरती तो है”। आज हम 2 कट्ठा जमीन बिकने पर टूट जाते हैं। मिट्टी माँ है – छोड़ना नहीं, जोड़ना है।
त्याग : – गंगा में हाथ बहा दिया पर झुके नहीं। आज का त्याग = जहर-खेती छोड़ना, पानी बचाना, मिलकर बेचना।
जगदीशपुर बचाएंगे” संकल्प – अपने गांव की 1 समस्या – पानी, नशा, पलायन – पर 10 लोग मिलकर काम शुरू करेंगे।
गंगा को हाथ” संकल्प: – कुंवर सिंह ने हाथ दिया। हम मिट्टी को पानी देंगे। इस जून हर खेत में डोभा खोदेंगे।
अस्सी साल के बाबू थे, पर शेर जवान थे,
एक हाथ गंगा में दिया, एक हाथ में कृपाण थे।
जगदीशपुर के राजा थे, पर दिल से किसान थे,
कुंवर सिंह अमर हैं, भारत की शान हैं।
आज 26 अप्रैल है – बाबू कुंवर सिंह को नमन करने का सबसे अच्छा तरीका: अपने खेत, अपने गांव, अपने स्वाभिमान के लिए खड़े हो जाना।
“जब तक जगदीशपुर में एक भी किसान जिंदा है, कुंवर सिंह मरे नहीं हैं।”




