रिपोर्टर– राजीव कुमार झा
मधुबनी जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। आर.एस. शिविर थाना झंझारपुर कांड संख्या-312/19 से जुड़े पॉक्सो एक्ट मामले में माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम सह विशेष पॉक्सो कोर्ट, मधुबनी ने आरोपी भरत मंडल को 11 वर्ष की सश्रम कारावास और 11,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी भरत मंडल, पिता अशोक मंडल, गांव दीप पश्चिम, थाना आर.एस. शिविर झंझारपुर, जिला मधुबनी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण), 366(ए) (नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाना) एवं 376 (दुष्कर्म) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत आरोपित बनाया था । मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी साक्ष्यों और गवाहों का गहन परीक्षण किया, जिसके बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए ये सजा सुनाई गई। मामले में विशेष लोक अभियोजक श्रीमती मधु रानी ने प्रभावी ढंग से न्यायालय में अपना पक्ष रखा। उन्होंने पीड़िता की ओर से मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे अभियोजन पक्ष को सफलता मिली और दोषी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नाबालिगों के खिलाफ इस तरह के अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर हैं और ऐसे मामलों में आरोपित को कठोर सजा आवश्यक है। पुलिस द्वारा किए गए अनुसंधान को भी इस मामले में सराहनीय माना गया है। समय पर साक्ष्य संकलन और सटीक चार्जशीट दाखिल करने से केस मजबूत बना और न्यायालय को निर्णय लेने में सहायता मिली। इस फैसले को समाज में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि नाबालिगों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती है और अपराधियों में कानून का भय कायम होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्वरित सुनवाई और सख्त सजा से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है। यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि समाज में सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है।




