रिपोर्ट- अमित कुमार!
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत से जुड़े मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। हॉस्टल के अंदर का करीब 10 मिनट 54 सेकेंड का CCTV फुटेज अब जांच का अहम आधार बनता जा रहा है।
फुटेज में देखा जा सकता है कि 6 जनवरी की दोपहर छात्रा के कमरे के बाहर हलचल शुरू होती है। सहेलियां बार-बार दरवाजा खटखटाती हैं, नाम लेकर आवाज देती हैं, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती।
करीब 3 बजकर 50 मिनट पर पास के कमरों की छात्राएं एक-एक कर वहां जमा होने लगती हैं। दरवाजा नहीं खुलने पर छात्राएं आपस में बातचीत करती दिखती हैं और दोबारा आवाज लगाई जाती है।
लगभग 4 बजे एक महिला हॉस्टल के गलियारे में प्रवेश करती है और स्थिति की जानकारी लेती है। इसके बाद दरवाजा खोला जाता है। कुछ ही देर में एक युवक छात्रा को बेहोशी की हालत में गोद में लेकर बाहर ले जाता दिखाई देता है। पीछे-पीछे वही महिला भी बाहर जाती नजर आती है।
यह पूरा घटनाक्रम अब कई सवाल खड़े कर रहा है—
दरवाजा अंदर से क्यों बंद था?
छात्रा की हालत उस समय क्या थी?
और सबसे अहम, समय रहते मदद क्यों नहीं मिल पाई?
सियासी और जांच से जुड़ा एंगल
बिहार में 2 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से ठीक पहले इस मामले की जांच CBI को सौंपने के फैसले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि SIT 22 दिनों में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई, जबकि ऐसे गंभीर मामलों में शुरुआती दिन बेहद अहम होते हैं।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा इस मामले में विफल साबित हुआ है। उनका कहना है कि यही सवाल विधानसभा में उठने वाले थे, इसलिए सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की।
अब सबकी नजर CBI की जांच पर है—
क्या पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलेगा?
और क्या इस केस से जुड़े तमाम सवालों के जवाब सामने आ पाएंगे?




