रिपोर्ट– राजीव कुमार झा!
फाइलेरिया उन्मूलन के तहत आगामी 10 फरवरी से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर सदर अस्पताल, मधुबनी में जिला समन्यवय समिति की बैठक का आयोजन एसीएमओ, डॉ एसएन झा की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में पिरामल के कार्यक्रम लीड धीरज सिंह ने पीपीटी के माध्यम से बताया कि फाइलेरिया (हाथीपांव) मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है, जो शरीर के लसीका तंत्र को नुकसान पहुँचाता है। समय पर दवा सेवन और मच्छर नियंत्रण से इस बीमारी की श्रृंखला तोड़ी जा सकती है। भारत सरकार ने वर्ष 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर डी एस सिंह सिंह ने बताया कि “जिले में कुल 1850 फाइलेरिया मरीज हैं, जिनमें 1350 लिम्फोडिमा और 500 हाइड्रोसील के मामले हैं। जिसमें 428 का सफल ऑपरेशन कर लिया गया है। वही 242 मरीजों को एमएमडीपी किट उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग लगातार सर्वे कर नए मरीजों की पहचान कर उन्हें सहायता प्रदान कर रहा है।
एमडीए कार्यक्रम के दौरान 2 वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को निःशुल्क दवा दी जाएगी।
दवा सेवन गाइडलाइन के अनुसार
2–5 वर्ष के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली 6–14 वर्ष आयु वर्ग को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली 15 वर्ष से अधिक को डीईसी की तीन और अल्बेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी।
दवा को चबाकर खाना होगा और खाली पेट सेवन नहीं करना है। गर्भवती महिलाएं, 2 वर्ष से कम बच्चे और गंभीर रोगी दवा न लें।
फाइलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग, आसपास पानी जमा न होने देना और घर की स्वच्छता आवश्यक है। हाइड्रोसील की स्थिति में ऑपरेशन से इलाज संभव है, जबकि लिम्फेडेमा मरीजों को एमएमडीपी किट प्रदान की जाती है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर डीएस सिंह ने सभी विभागों से अपील की
“फाइलेरिया उन्मूलन सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि सभी लोग दवा का सेवन करें और मच्छरों के प्रजनन को रोकें, तो मधुबनी निश्चित रूप से 2027 तक फाइलेरिया मुक्त जिला बन सकता है।”
मौके पर डीपीआरओ परिमल कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा, डिंपू कुमार, अमर कुमार,लक्ष्मी झा, पिरामल के धीरज सिंह, कुश कुमार, सीफार के अमन कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।




