श्रीराम का जीवन व्यवहार मर्यादा का संविधान हैं –आचार्य धर्मेन्द्र!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार!


बक्सर। बामन भगवान की जन्मभूमि , श्री राम की शिक्षा व कर्मभूमि, उत्तर वाहिनी भागीरथी गंगा बक्सर के प्रसिद्ध घाट सिद्ध नाथ घाट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में विश्वाचार्य विद्या वाचस्पति ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज सूर्य वंश की कथा का विस्तार देते हुए कहा कि श्री राम जी जीवनशैली , जीवन व्यवहार सत्यं शिवम् सुन्दरं जीवनशैली का श्रेष्ठ संविधान हैं। श्री राम मानव के रूप में सरल,तरल,विमल,विरल है।पुत्र राम, भाई राम,मित्र राम, शिष्य राम,पति राम, राजाराम अनुकरणीय व सराहनीय हैं।यहां तक की शत्रु रावण भी यह कहने से अपने को रोक नहीं पाया कि शत्रु हो तो राम जैसा। सीता हरण के बाद रावण को उदास देख मन्दोदरी पूछती है अब तुम उदास क्यों?,रावण कहता है सीता मेरे तरफ देखती नहीं। फिर मन्दोदरी कहती हैं तुम रूप बनाने में दक्ष हो, श्रीराम का रूप बनाकर देख जरा। रावण कहता है कि राम का रूप भी बनाकर देख लिया। मंदोदरी कहती हैं फिर क्या हुआ?, रावण कहता है कि जैसे ही राम का रूप बनाया हूं , वैसे ही मेरा विचार ही बदल जाता, सीता के प्रति दृष्टिकोण ही बदल जाता।मेरे राम ऐसे हैं। आचार्य जी ने विस्तार से श्री राम के जन्म का हेतु, बाल लीला , विवाह लीला , वन लीला ,रण लीला ,राज लीला , साकेत गमन लीला पर गंभीरता के साथ शिक्षाप्रद कथा कही। सूर्य वंश के अन्य राजाओं यथा इक्ष्वाकु , शर्यति, दिष्ट,नरिष्यंत,पृसध्र,नभग,नभाग, अम्बरीष,युवनाश्व, मंधाता, त्रिशंकु , हरिश्चंद्र,सगर भागीरथी,खटवांग,रघु,अज आदि कीसूत्रवत कथा कहते हुए गंगा अवतरण की दिव्य कथा सुनाई। आचार्य जी कल चन्द्र वंश की कथा कहने की सूचना दी। कथा में आये भक्तों की सेवा व्यवस्था पं शिवजी बाबा और उनके भक्त सहयोगी संभाले हुए है। कथा की पूर्णाहुति 22को औरविशाल भंडारा 23 जनवरी को संपन्न होगा। सुमन रामानुज वैष्णवदास और गुरुकुल पत्रकारिता प्रकोष्ठ, बिहार के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी, अनमोल कुमार ने उक्त आशय की जानकारी दी।

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