रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!
भीड़ में नेपाल से पहुंचे श्रद्धालुओ को भोजन देकर भारत ने जीता उनका दिल, सुरक्षा के साथ दिखी ‘मानवता की झलख
भारत के सीमा प्रहरी ने पड़ोसी श्रद्धालुओं का किया स्वागत, सफर को बनाया यादगार
मधुबनी जिले से लगने बाली भारत नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने एक बार फिर अपनी मानवीय संवेदनाओं का शानदार परिचय दिया है। जयनगर रेलवे स्टेशन पर फंसे नेपाल से आए सैकड़ों यात्रियों को रात्रि भोजन उपलब्ध कराकर एसएसबी ने न केवल उनकी भूख मिटाई, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी सौहार्द को नई ऊंचाई भी प्रदान किया है। गृह मंत्रालय के अधीन 48 वीं वाहिनी ने यह कदम विशेष रूप से चल रही द्वारिका गुजरात में आयोजित बरे धार्मिक अनुष्ठान को लेकर जाने वाली रेलगाड़ी की भारी भीड़ के बीच उठाया है, जो एक मिसाल कायम करता है। जयनगर से द्वारका (गुजरात) जाने वाली विशेष रेलगाड़ी 16 जनवरी को सायं 06:00 बजे प्रस्थान करने वाली थी। सभी बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी थीं, लेकिन नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्री स्टेशन पर पहुंच गए। इससे प्लेटफॉर्म और परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। कई नेपाली नागरिकों को रात गुजारने के लिए खुले आसमान तले प्लेटफॉर्म पर ही सोना पड़ा और स्थिति भी असुविधाजनक थी, लेकिन एसएसबी के जवान फौरन सक्रिय हो गए। भीड़ प्रबंधन और अव्यवस्था बनाने के लिए सभी समवाय कमांडरों ने यात्रियों को स्थिति की जानकारी दी और आवागमन नियंत्रित किया। इसी क्रम में 48 वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल ने मानवीयता दिखाते हुए जरूरतमंद सैकड़ों नेपाली यात्रियों को ठंड की रात्रि में गर्म भोजन वितरित किया। भोजन में रोटी, सब्जी, दाल और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल थी, जो यात्रियों की थकान और भूख को तृप्त करने में सहायक सिद्ध हुई। इस अवसर पर 48 वीं वाहिनी के कमांडेंट गोविंद सिंह भंडारी ने कहा, “सशस्त्र सीमा बल केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय मूल्यों और कर्तव्यों के प्रति भी पूर्णतः प्रतिबद्ध है। विषम परिस्थितियों में फंसे यात्रियों की सहायता करना हमारा नैतिक दायित्व है। नेपाली नागरिकों को रात्रि भोजन उपलब्ध कराना इसी सेवा भावना का प्रतीक है। भविष्य में भी बल हर आवश्यकता के समय मानवता के साथ खड़ा रहेगा।” बताते चलें कि एसएसबी की इस संवेदनशील पहल से यात्रियों को अपार राहत मिली। नेपाली नागरिकों ने खुलकर एसएसबी की तारीफ की और भारतीय जवानों को धन्यवाद भी दिया। कई यात्रियों ने कहा कि यह कार्य दोनों देशों के बीच भाईचारे का प्रतीक है। जयनगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह के प्रयास भारत नेपाल संबंधों को और मजबूत करने वाली साबित होती है। एसएसबी न केवल शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि मानवीय सेवाओं के क्षेत्र मे बेहतरीन प्रदर्शन से स्थानीय लोगों का दिल भी जीतता है। 48 वीं वाहिनी जयनगर में हमेशा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय दायित्व भी निभाती रही है। ऐसी पहल से सीमा पर विश्वास तो बढ़ाती हैं और साथ ही पड़ोसी देश के साथ रिश्तों को सुदृढ़ भी करती हैं। बता दें कि इस पहल में स्थानीय अनुमंडल प्रशासन ने भी एसएसबी की इस मुहिम कि सराहना की है।




