ठंड और कुहासे ने मोतिहारी को किया बेहाल, जनजीवन अस्त-व्यस्त!

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रिपोर्ट- धर्मेंद्र कुमार!

अचानक गिरी ठंड से बढ़ी मुश्किलें, घर से निकलना हुआ दुश्वार

घने कुहासे में लाइट जलाकर रेंगती रहीं गाड़ियां, बच्चे स्कूल जाने को मजबूर

चौक-चौराहों पर जले अलाव, फिर भी ठिठुरते रहे राहगीर

अलाव की लकड़ी पर उठे सवाल, दुकानदारों पर ले जाने का आरोप

कंबल वितरण न होने से गरीब-बेसहारा बेहाल, प्रशासन पर फूटा गुस्सा

ठंड के सितम के आगे बेबस मोतिहारी, राहत व्यवस्था पर सवाल

मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अचानक गिरे तापमान और घने कुहासे ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सर्द हवाओं के बीच लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के चलते उन्हें मजबूरी में बाहर निकलना पड़ रहा है। शहर में शाम पांच बजे से लेकर सुबह दस बजे तक घना कुहासा छाया रहता है। हालात ऐसे हैं कि सड़क पर कुछ ही दूरी तक दिखाई नहीं देता। वाहन चालक अपनी गाड़ियों की लाइट जलाकर बेहद धीमी गति से चलने को मजबूर हैं। इसी ठंड और कुहासे के बीच छोटे-छोटे मासूम बच्चे भी स्कूल जाते नजर आ रहे हैं, जो हालात की गंभीरता को बयां करता है।

ठंड से राहत के लिए मोतिहारी नगर निगम की ओर से शहर के चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। शाम होते ही अलाव जलाए जा रहे हैं, ताकि राहगीरों और जरूरतमंदों को कुछ राहत मिल सके।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से लकड़ियां तो गिराई जा रही हैं, लेकिन चौक-चौराहों पर स्थित दुकानदार अलाव की लकड़ी उठा ले जाते हैं, जिससे जरूरतमंदों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब तक प्रशासन की ओर से कंबल वितरण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। न तो नगर निगम और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से गरीब और बेसहारा लोगों तक कंबल पहुंच पाए हैं।

इस मुद्दे पर लोगों ने मोतिहारी नगर निगम, जनप्रतिनिधियों और नगर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और ठंड से बचाव के लिए तत्काल कंबल वितरण की मांग की है।
कुल मिलाकर, मोतिहारी में ठंड और कुहासे ने हालात कठिन बना दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन राहत कार्यों को कितनी तेजी और गंभीरता से आगे बढ़ाता है।

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