रिपोर्ट-विक्रम उपाध्याय/खगड़िया
उर्दू निदेशालय, पटना (बिहार सरकार) के तत्वावधान में जिला उर्दू भाषा कोषांग, खगड़िया के सौजन्य से जिला स्तर पर एक दिवसीय संगोष्ठी-सह-कार्यशाला एवं मुशायरा का भव्य, सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उर्दू भाषा के ऐतिहासिक महत्व, इसकी साहित्यिक समृद्धि तथा वर्तमान समय में इसके संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार पर व्यापक विमर्श करना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री जियाउर्रहमान, अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, खगड़िया द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने उर्दू भाषा के प्रारंभिक उद्भव, उसके ऐतिहासिक विकास और भारत तक उसके विस्तार पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की एक अमूल्य धरोहर है, जो आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की भावना को मजबूत करती है।
कार्यक्रम में जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी श्री राकेश रंजन ने खचाखच भरे सभागार को संबोधित करते हुए कहा कि उर्दू दुनिया की बेहतरीन और भारत की सबसे मीठी भाषाओं में से एक है। यह भाषा सुनने में मन को शांति और आनंद प्रदान करती है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को विद्यालयों में बेहतर ढंग से उर्दू शिक्षा प्रदान करें और इसके विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि उर्दू भाषा के विकास में कोई कमी या समस्या है, तो उसे दूर करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
कार्यशाला सत्र को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री अमरेंद्र कुमार गोंड ने उर्दू भाषा की लोकप्रियता और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने बचपन के दिनों की स्मृतियों को साझा करते हुए उर्दू भाषा से अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा भारत की सभ्यता और संस्कृति की अटूट कड़ी है तथा यह मानव के दिलों को जोड़ने वाली भाषा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायती राज पदाधिकारी-सह-प्रभारी जिला उर्दू भाषा कोषांग पदाधिकारी श्री राकेश रंजन ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा में अद्भुत मिठास, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि है, जो इसे अन्य भाषाओं से विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि भाषा का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और ऐसे आयोजन इस दिशा में सार्थक पहल हैं।
संगोष्ठी-सह-कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने उर्दू भाषा के इतिहास, साहित्य, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की। विदित हो कि यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष उर्दू भाषा के विकास को लेकर आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. शब्बीर असगर द्वारा किया गया।
सेमिनार सत्र में आलेख पाठक के रूप में प्रो. डॉ. अमीन (कोशी कॉलेज, खगड़िया), प्रो. डॉ. सैय्यद जैनुल हक शम्सी (डीआरएम कॉलेज, मुंगेर) एवं आरएम कॉलेज, सहरसा के विद्वानों ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त प्रो. डॉ. मंसूर आलम फरीदी, डॉ. शब्बीर असगर, श्री मो. सरवर आलम इमाम एवं मो. शम्सुद्दीन साहब ने उर्दू भाषा पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित भव्य मुशायरा में बिहार के प्रसिद्ध कवियों और शायरों ने भाग लिया। मुशायरे में डॉ. इजाज रसूल (पटना), मो. अबरार दानिश (किशनगंज), मो. मसलेहुद्दीन काज़मी (खगड़िया), डॉ. नूतन सिंह, साबिर सहरसाबी, जमाल खान परवाना, डॉ. साक्षी स्वरा, कामरान अल्वी एवं इकबाल नाला सहित कई कवियों ने अपनी ग़ज़ल, नज़्म और शायरी प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की सफलता में जिला उर्दू भाषा कोषांग की अनुवादक श्रीमती रिजवाना प्रवीण, सहायक उर्दू अनुवादक श्री मो. नासिर हुसैन सहित अन्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में खगड़िया जिले के सभी अनुमंडल, प्रखंड एवं अंचल में कार्यरत उर्दू कर्मी — मुज़फ्फर कासमी, अदिति अज्ञेय, अब्दुल रहीम सहित अन्य कर्मियों ने भी सक्रिय योगदान देकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम के अंत में जिला पंचायती राज पदाधिकारी-सह-प्रभारी जिला उर्दू भाषा कोषांग, खगड़िया द्वारा धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की गई।




