रिपोर्ट- अमित कुमार!
हिंदू हो या मुस्लिम, हर महिला की पहचान उसके वैध दस्तावेज से ही होगी—यह तो स्वाभाविक ही है। जब हज यात्रा के लिए एयरपोर्ट पर कठोर जांच का सामना करते हुए कोई आपत्ति नहीं जताता, तो लोकतंत्र के पवित्र मंदिर—मतदान केंद्र—पर पहचान की सत्यापन प्रक्रिया को ही क्यों अन्याय का पर्याय बना दिया जाए? यह तो न्याय का सिद्धांत ही तो है, कि हर कदम पर स्पष्टता हो।
सच्चाई यह है कि विपक्ष को असल में पारदर्शिता और निष्पक्षता की चुभन महसूस होती है। चुनाव प्रक्रिया को और अधिक मजबूत, अटल तथा भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के सकारात्मक प्रयास चल रहे हैं, किंतु यह सुधार विपक्ष की आंखों में खटकते हैं। क्यों? क्योंकि उनकी राजनीति का आधार तो भ्रम की धुंध और तुष्टिकरण की चाल पर टिका है।
नीरज कुमार, भाजपा प्रवक्ता




