रिपोर्टर — राजीव कुमार झा
-मधुबनी जिले के रहिका प्रखंड अंतर्गत सौराठ गांव स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान के प्रांगण में 48 वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, जयनगर द्वारा आयोजित 12 दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की ग्रामीण महिलाओं को मिथिला कला एवं हस्तशिल्प के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति के अनुसार दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर एस एस बी 48 वीं वाहिनी के कमांडेंट गोविंद सिंह भंडारी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया एवं अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने कहा की
यह कार्यशाला न केवल कला सीखने का अवसर है, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्वाभिमान की दिशा में एक सार्थक कदम है। जब महिलाएँ सशक्त होती हैं, तो परिवार और समाज दोनों मजबूत बनते हैं।
कार्यक्रम में मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी के उप निदेशक नितीश कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व का अवसर है कि संस्थान को ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास से जोड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है।
संस्थान के फैकल्टी सदस्य पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी एवं पद्मश्री शिवन पासवान का उल्लेख विशेष रूप से किया गया, जिन्होंने मिथिला कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है और प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
इस कार्यशाला में कुल 30 ग्रामीण महिलाएँ भाग ले रही हैं, जिन्हें अगले 12 दिनों तक मिथिला पेंटिंग, पारंपरिक डिज़ाइन, हस्तशिल्प एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
उद्घाटन समारोह के पश्चात सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों के लिए रिफ्रेशमेंट का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में 48 वीं वाहिनी, एस.एस.बी. जयनगर के अधिकारीगण, संस्थान के प्रशिक्षकगण एवं स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
एस एस बी एवं संस्थान के संयुक्त प्रयास से आयोजित कार्यशाला का मुख्य आकर्षण
महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता पर केंद्रित कार्यशाला,
पद्मश्री सम्मानित कलाकारों द्वारा कला प्रदर्शन,




