जीतन राम मांझी ने पूर्णियाँ रैली में की 20 सीटों की माँग, कई वादे भी किये!

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रिपोर्ट- अमित कुमार

विस्तृत रिपोर्ट: जीतन राम मांझी का पूर्णिया रैली में संबोधन और प्रमुख दावे
12 अप्रैल 2025, पूर्णिया

मुख्य आकर्षण:
पूर्णिया की रैली में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने साफ किया कि वे एनडीए में रहेंगे लेकिन अपने हक के लिए संघर्ष भी जारी रखेंगे। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक दांव चल दिया है, जिससे एनडीए में हलचल तेज हो सकती है।

हम पार्टी की ताकत और 20 सीटों की मांग

मांझी ने मंच से जोर देकर कहा कि बिहार में उनकी पार्टी की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा: “अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो ताकत दिखाने में देर नहीं करेंगे। दिल्ली और झारखंड में हमें अनदेखा किया गया, पर बिहार में ऐसा नहीं चलेगा।” उन्होंने वंचित समाज को गोलबंद रहने की सलाह देते हुए कहा कि राजनीति में जीते गए संख्या बल ही हमे अधिकार दिला सकती है।

मुसहर समाज को लेकर हमलावर रुख

तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए मांझी ने कहा:
“आरजेडी सिर्फ मुसहर समाज को वोट बैंक की तरह देखती है, जबकि हमने उनके लिए योजनाएं जमीन पर उतारी हैं।”

उन्होंने भूमिहीनों को जमीन, शिक्षा और रोजगार सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

नीतीश के साथ, लेकिन बेटे के मंत्रालय से असंतोष

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार एनडीए के मजबूत स्तंभ हैं।

“तेजस्वी यादव की राजनीति गुंडागर्दी और जमीन हड़पने की है। हम नीतीश जी के साथ हैं।” उन्होंने यूपीए गठबंधन की राजनीति को सिर्फ जीत कर सरकार बनाने वाली पार्टियों वाला बताते हुए कहा कि एनडीए एक मात्र पार्टी हे जिसके पास देश के विकाश का विजन है, हमलोगों ने वादा किया है कि देश को 2047 तक विकसित देश बनाएंगे।

लेकिन साथ ही बेटे संतोष सुमन को मिले मंत्रालय को लेकर नाराजगी जाहिर की और इसे “सहमति से परे” बताया।

पूर्णिया को विशेष पैकेज का वादा

उन्होंने पूर्णिया के लिए स्थानीय उद्योगों, कृषि क्षेत्र और रोजगार पर फोकस करने की बात कही।
दीपा मांझी ने कहा कि

“केंद्रीय मंत्री के रूप में मांझी जी इस क्षेत्र के लिए विशेष फंड लाएंगे।”

पत्रकार हत्या और दिल्ली चुनाव पर प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ में पत्रकार की हत्या की निंदा करते हुए उन्होंने कहा: “पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र की सुरक्षा है। इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए।”

दिल्ली चुनाव पर बोले:
“केजरीवाल के वादे खोखले हैं, दिल्ली की जनता अब समझदार है।”

निष्कर्ष:
पूर्णिया रैली के माध्यम से मांझी ने अपने राजनीतिक एजेंडे को धार दी है। एनडीए में रहकर दबाव की रणनीति अपनाते हुए वे दलितों, मुसहरों और वंचित समाज के वोट बैंक को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रहे हैं। अगली रणनीतिक बैठक 28 फरवरी को पटना में होगी, जहां और बड़े ऐलान संभव हैं।

(बाईट)
“हमने समाज के सबसे पिछड़े वर्ग के लिए जो किया है, वो सिर्फ वादा नहीं, धरातल पर दिखता है।” – जीतन राम मांझी

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