बक्सर के इतिहास में पहला देहदान, राम छबीला सिंह का पार्थिव शरीर IGIMS क़ो सौंपा गया!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

पटना। दधीचि देहदान समिति बिहार के जागरूकता अभियान के फलस्वरुप बक्सर निवासी प्राचार्य 90 वर्षीय रामछबिला सिंह का पार्थिव शरीर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के एनाटोमी विभाग को सौंपा गया।
आज से कुछ वर्ष इन्होंने दधीचि देहदान समिति में अपना देहदान का संकल्प पत्र भरा था। ज्ञात हो कि रामछबिला जी बिहार से सटे राज्य उत्तर प्रदेश के गहमर, गाजीपुर में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य के रूप में पद स्थापित थे तथा वे राष्ट्रपति से भी पुरस्कृत थे।

मृतक का देहांत वनारस में हुआ उसके बाद शरीर को पैतृक गांव बक्सर लाया गया । बक्सर से एम्बुलेंस द्वारा उनका शरीर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लाया गया। मृतक के शरीर को रिसीव करने के लिए अस्पताल में दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष श्री गंगा प्रसाद, पूर्व राज्यपाल, महासचिव पद्मश्री बीमल जैन, दीघा विधायक माo संजीव चौरसिया,निदेशक डॉ बिंदे कुमार,अधीक्षक एवं सोटो के चेयरमैन डॉ मनीष मंडल,विभागाध्यक्ष एनाटॉमी, डॉ अवनीश कुमार,उपाध्यक्ष डॉ सुभाष प्रसाद, कोषाध्यक्ष प्रदीप चौरसिया बक्सर इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व मेयर श्रीमती मीना सिंह एवं समिति के सदस्यगण एवं मृतक के परिजन भतीजा श्री सुजीत कुमार उनके सुपुत्र श्री अमन कुमार की उपस्थिति में संपूर्ण शरीर को एनाटॉमी विभाग को सौपकर पीड़ित मानवता की सेवा के लिए एक मिसाल कायम किया।
इस मार्मिक घड़ी में अस्पताल परिसर में बैकुंठवासी आत्मा को उपस्थित लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा एक मिनट का मौन रखा गया। अस्पताल प्रशासन और दधीचि देहदान समिति द्वारा मृतक के परिवार को साहसिक कार्य हेतु साधुवाद दिया गया।
दधीचि देहदान समिति बक्सर इकाई के अध्यक्ष श्रीमती मीना सिंह जो पूर्व मेयर भी रही है। उनके अथक प्रयास का ही यह प्रतिफल था और वे स्वयं इस अवसर पर शव को लेकर बक्सर से अस्पताल तक आई है।
समिति के अध्यक्ष- पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद जी ने श्रद्धांजलि अर्पित की एवं उपस्थित लोगों से आवाहन किया कि मृत्यु के बाद शरीर दान करने का परंपरा शुरू किया जाए। यह अदभुत है। ऐसा करने वाले बहुत कम है। हमें इसमें आगे बढ़ना है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करना है।

देहदानी के शरीर का इस्तेमाल मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी कर सकेंगे बता दें कि प्रत्येक 20 विद्यार्थी पर एक देह की आवश्यकता होती है लेकिन बिहार में मृत शरीर नहीं मिलने पाने के कारण यह औसत 300 विद्यार्थी पर एक ही है ।

इस मौके पर विनीता मिश्रा, अरुण सत्यमूर्ति,संजीव यादव, गोविंद कनोड़िया, बक्सर इकाई से बबन सिंह,नीलम श्रीवास्तव,डॉ हिंगमणि,भोला जी एवं बड़ी संख्या में परिवार के लोग उपस्थित रहे ।

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