ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक समर्थकों ने मनाया संत रविदास जंयती!

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रिपोर्टर — राजीव कुमार झा

मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड मुख्यालय अन्तर्गत बेहटा गांव ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक कार्यालय पर अनुमंडल स्तरीय संत रविदास जयंती कामरेड सोंधारी राम के अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत संत रविदास के तैल चित्र पर माला एवं फुल अर्पित कर किया गया। जयंती समारोह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कामरेड प्रेम कुमार झा ने कहा कि संत रविदास का जन्म 14 33 में माघ पूर्णिमा को बनारस के निकट सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था। बालकाल से ही भक्ति भाव में लगे रहे संत रैदास के समय मध्य युग में मुगल आक्रमण के दौरान सनातन संस्कृति में पाखंड एवं आडंबर की बहुलता से भारतीय समाज में आपसी वैमनस्यता का आता भाव प्रबल रूप से छा गया था। इस दौरान संत कवियों ने पाखंड तथा आडंबर के खिलाफ एक वैचारिक आंदोलन सुरु किया। इन्हीं संत कवियों में कबीर दास के गुरुभाई रैदास भी शामिल थे।संत रविदास ने कहा था कि कुरान ,करीम, राम ,हरि, राघव, जबलग एक न पेख,बेद, कटेब, कुराण,पुरानंन सहज एक एक देख इसका भावार्थ संत रविदास ने अपने इस दोहे में कहते हैं राम ,कृष्ण ,हरी, ईश्वर, करीम ,राघव, सब एक ही ईश्वर के अलग-अलग नाम है वेद, पुराण, कुराण सभी ग्रंथ एक ही ईश्वर का गुणगान करते हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला महासचिव कामरेड बेचन राम ने कहा कि संसार भर के संत महात्माओं में संत रविदास को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। संत कबीर दास समकालीन व मध्यकालीन कवियों में संत रविदास को भक्त रैदास भी कहा जाता है। जो स्वयं को माता गंगा का बरदपुत्र मानते थे, जब रविदास जी की आयु 8 साल की थी वह गंगा किनारे बैठे भक्ति भाव में लीन थे उसी समय गंगा की धारा अचानक बहुत बढ़ गई लेकिन रविदास को जैसे चारों ओर लक्ष्मण रेखा की भांति बीच में बगैर स्पर्श किए आगे बढ़ती रही रविदास भी अविरल निडर होकर बैठे रहे तकरीबन 4 घंटे बाद धारा स्वंय शांत हो गई। दिन रात भक्ति भाव में देखकर क्रोध में पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया। तब उन्होंने गंगा के किनारे शरण लिए। कार्यक्रम को संबोधित जिला उपाध्यक्ष संतोष कुमार शाह, जिला कोषाध्यक्ष पंचू पासवान, जिला सचिव गुड्डू मंडल, मलभोगिया देवी, बीरबल दास, अश्वेर पासवान, कैलाश राम, जोगीराम, उपेंद्र पासवान, तेतर पासवान, दुखी पासवान,राजकुमार ठाकुर, राम रूप सदा, विजय दास, जोगी राम, सोनी देवी, दुखनी देवी, जरीना खातून, रेशमा देवी, सरस्वती देवी, समुद्री देवी, दुखनी देवी, गुलाबो देवी ने किया। वही कार्यक्रम में दर्जनों लोगों ने भाग लिया।

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