रिपोर्ट- आशुतोष पांडेय!
- पटना इंदौर व राजधानी एक्सप्रेस के आरा में ठहराव नहीं होने से यात्रियों को हो रही परेशानी:-
- घंटों अपना कीमती समय बर्बाद कर दूसरे स्टेशनों से यात्रा करने को मजबूर है यात्री
दानापुर मंडल के अंतर्गत आरा जंक्शन कमाई के मामले में पूर्व मध्य रेल के टॉप 10 की सूची में तो शामिल है लेकिन आज भी यहां यात्री सुविधाओं का काफी घोर अभाव है। आरा जंक्शन पर आज भी यात्रियों के मांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण गाड़ियों का ठहराव नहीं हो सका है जबकि इससे कम महत्वपूर्ण और कम राजस्व वाले स्टेशनों पर इन गाड़ियों का ठहराव दिया गया है। पटना को धार्मिक नगर उज्जैन तथा इंदौर से सप्ताह में तीन दिन जोड़ने वाली गाड़ी 19313/14 पटना इंदौर वाया सुल्तानपुर तथा 19321/22 पटना इंदौर वाया अयोध्या के आरा में ठहराव नहीं होने से यात्री पटना और बक्सर जैसे स्टेशनों पर अपने कीमती समय को बर्बाद करके ट्रेन पकड़ने को मजबूर है। बता दे कि भोजपुर जिले से हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त महाकाल की नगरी उज्जैन दर्शन करने के लिए जाते है व हजारों छात्र मेडिकल की तैयारी व कामगार अपने रोजगार के लिए इंदौर में निवास करते है लेकिन अबतक भोजपुर जिले से इन दोनों शहरों के बीच कोई रेल सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। यात्रियों से बातचीत के दौरान आरा निवासी उत्कर्ष रंजन,अमित व रोहित सहित कई अन्य यात्रियों ने बताया कि पटना इंदौर एक्सप्रेस एक सामान्य मेल-एक्सप्रेस की गाड़ी है इसके बावजूद करोड़ों का राजस्व देने वाला आरा स्टेशन पर ठहराव नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है जबकि पटना इंदौर एक्सप्रेस बक्सर में भी रुकने लगी है। यदि इसका ठहराव आरा में होता है तो आरा व आसपास के क्षेत्र का सीधा जुड़ाव इंदौर-उज्जैन से हो जाएगा।
- आरा होकर गुजरने वाली ४ राजधानी में किसी का भी नहीं ठहराव
आरा जंक्शन पर एक अरसे से राजधानी एक्सप्रेस के ठहराव की मांग भी होती रही है जिसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री आर के सिंह से लेकर वर्तमान सांसद सुदामा प्रसाद तक ने आवाज उठाई है। बता दे कि बिहार में आरा जंक्शन से कम आय वाले कई स्टेशनों पर ठहराव के सभी नियमों को दरकिनार कर राजधानी एक्सप्रेस व एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव दिया जाता रहा जिसका ताजा उदाहरण 12424/23 डिब्रूगढ़ राजधानी का खगड़िया के मानसी स्टेशन पर दिया गया ठहराव है। वहीं आरा से होकर 4 राजधानी एक्सप्रेस गुजरती है इसके बावजूद किसी का ठहराव नहीं देना रेलवे द्वारा आरावासियों के साथ दोहरी नीति अपनाने जैसा है जिससे यात्रियों में रोष व्याप्त है।
- ठहराव के सभी मानक पूरे पर आज भी महत्वपूर्ण ट्रेनों का है इंतज़ार
बता दे कि रेलवे के नए नियम के अनुसार किसी स्टेशन पर गाड़ियों के प्रायोगिक ठहराव से प्रति यात्रा से औसतन आय 16 से 22 हजार रुपए तक होना चाहिए लेकिन आरा जंक्शन इन सब मामलों में कही आगे है। रेलवे की उपेक्षा का आलम यह है कि सभी मानकों के पूरा होने के बावजूद दोहरी नीति शाहाबाद को लेकर अपनाई जाती रही है। आरा शहर के लगातार होते विस्तार व आसपास के जिलों से बेहतर संपर्क होने के कारण आरा जंक्शन पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ा है लेकिन उस अनुपात में यात्रियों के मांग अनुसार ट्रेनों की संख्या कम पड़ रही हैं! आरा जंक्शन रेल फैन क्लब व यात्री संगठनों के द्वारा मांग की गई है कि पटना इंदौर व राजधानी एक्सप्रेस का प्रायोगिक तौर पर ठहराव रेलवे द्वारा देकर देख लिया जाए, उम्मीद से ज्यादा यात्री भार व राजस्व प्राप्त होगा।




