नारी सशक्तिकरण सामाजिक विकास की आधारशिला: संजीव चौरसिया!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 6 महिला पंचायत प्रतिनिधियों को मिला सम्मान

पटना: नारी का सशक्तिकरण ही सामाजिक विकास की बुनियाद है. केंद्र और राज्य सरकारें भी नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। नारी की भूमिका सभी क्षेत्रों में समान रूप से निरंतर आगे बढ़ रही है। महिलाओं के उत्थान से ही परिवार, समाज, राज्य और देश का विकास संभव है। उक्त बातें विधायक संजीव चौरसिया ने नारी सहभागिता के अनुभव और सशक्तिकरण के आयाम पर सहयोगी संस्था द्वारा क्रिया संस्था के सहयोग से आयोजित कार्यशाला के दौरान कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में विशेष प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

6 महिला जन-प्रतिनिधियों को मिला सम्मान:

इस दौरान विधायक संजीव चौरसिया ने 6 महिला जन-प्रतिनिधियों को नारी सशक्तिकरण के उत्कृष्ट प्रयासों के लिए सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं ने पंचायत स्तर पर न केवल अपने अधिकारों को पहचाना है, बल्कि वे समाज की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं। इस सम्मान से यह संदेश मिलता है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी हो सकती हैं यदि उन्हें सही दिशा और समर्थन मिले।

पटना की महापौर सीता साहू ने कहा कि महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। महिला सशक्तिकरण की प्रथम सीढ़ी यह है कि महिलाएं अपने अधिकारों से अवगत होकर स्वयं को सशक्त करने की कोशिश करें। पंचायत स्तर पर महिलाओं की बढ़ती सक्रियता इस बात की पुष्टि करती है कि समाज में नारी सशक्तिकरण के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों की जानकारी ही उन्हें समाज में सही स्थान दिला सकती है।

दानापुर प्रखंड की ब्लॉक प्रमुख वंदना राय ने कहा कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता से नारी सशक्तिकरण को बल मिलेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की आवाज को पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत मंच की आवश्यकता है।

दानापुर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी विभेष आनंद ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की प्रगति में महिलाओं का संसाधनों पर पकड़ होना अहम है। उन्होंने बताया कि महिलाएं जब आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तब वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं और समाज में अपनी भूमिका को मजबूती से निभा सकती हैं।

लिंग आधारित भेदभाव के खिलाफ एकजुटता जरूरी:

सहयोगी संस्था की निदेशक रजनी ने सहयोगी संस्था के कार्यों पर जानकारी देते हुए कहा कि सहयोगी संस्था विगत 2016 से ही किशोरी, महिलाएं, पंचायत प्रतिनिधि और स्कूलों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सहयोगी संस्था का उद्देश्य लिंग आधारित भेदभाव एवं घरेलू हिंसा के खिलाफ किशोरी एवं महिलाओं को एकजुट करते हुए उनका सशक्तिकरण करना है। विगत दो वर्षों से पुरुषों को लिंग आधारित भेदभाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें सही शिक्षा और मार्गदर्शन की जरूरत है, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

हंगर प्रोजेक्ट की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी शाहिना प्रवीण ने महिलाओं के जीवन में व्याप्त चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पंचायत स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना जरूरी है, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें और अपने परिवार के साथ-साथ समाज का भी विकास कर सकें।

इस दौरान प्रदान की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सहाना मिश्रा ने भी पंचायत स्तर पर महिलाओं की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना केवल एक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह समाज में महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास के सलाहकार डॉ. राजेश कुमार प्रज्वल सहित पटना जिले के पंचायत प्रतिनिधि, महिलाएं और किशोरियां शामिल हुईं। उन्होंने नारी सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए और इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

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