रिपोर्ट – अरविंद कुमार!
विद्यालय की कु व्यवस्था देख बच्चों के अभिभावक व जन प्रतिनिधि हुए हैरान,
समस्तीपुर जिले के राजकीय मध्य विद्यालय खानपुर इन दिनों अपनी कु व्यवस्था को लेकर काफी चर्चा में है। जहां बच्चों से लेकर सहायक शिक्षक तक इसका शिकार हो रहे हैं,इतनाही नहीं बच्चों के अभिभावक व जनप्रतिनिधि भी इस कु वैवस्था पर अब सवाल खड़े कर रहे हैं। जी हां मामला विद्यालय के कई गंभीर मुद्दों को लेकर है। जिसमें प्रधानाध्यापिका एवं वहां के एक अनुसूचित जाति के शिक्षिका के बीच हो रहे विवाद के कारण एक और जहां बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है वही विद्यालय में आवश्यकतानुसार कुर्सी नहीं होने के कारण कुछ शिक्षक कुर्सी पर बैठते हैं तो कुछ शिक्षक बेंच पर बैठने को मजबूत होते हैं। जिसकी शिकायत शिक्षकों ने भी की है। बता दें कि वर्ग एक एवं दो के छोटे-छोटे नन्हे मुन्ने बच्चे विद्यालय का अपना भवन नहीं होने के कारण विद्यालय के पास में बने बंद पड़े आयुष चिकित्सालय केंद्र जहां घने घने जंगल उगे हुए हैं जिसमें एक कमरा है जिस कमरे में बच्चों की पढ़ाई कराई जाती है न तो वहां लाइट की वैवस्था है और नहीं पंखे की ओर नही ब्लैक बोर्ड की, आखिर बच्चों को पढ़ाएं भी तो कैसे। रूम की चारों ओर घने घने जंगल होने के कारण उन जंगलों में जहरीले जानवर, सनगोई,सांप व कई प्रकार के कीड़े मकोड़े वर्ग में प्रवेश कर जाते हैं। जिसके काटने से बच्चों की कभी भी मौत हो सकती है। बताया जाता है कि प्रधानाध्यापिका के द्वारा विद्यालय विकास मद में जो राशि आती है उसका भी निकासी कर अवैध तरीके से गवन कर लिया जाता है। जिसके कारण न तो विद्यालय में रंग रोहन का कार्य सही से हो पा रहा है और ना ही विद्यालय में आज तक मिथिला पेंटिंग ही कराया गया है। बच्चों के बैठने के लिए बैंच डेक्स की भी कमी है। इस बाबत स्थानीय मुखिया अरुण कुमार सिंह कुशवाहा ने बताया कि आज तक विद्यालय में शिक्षा समिति की बैठक तक नहीं कराई गई है जिससे पता चले की विद्यालय में कितनी राशि आई और उस राशि से कौन-कौन सा कार्य कराया गया,यहां तक की जहां बच्चे पठन-पाठन का कार्य कर रहे हैं उसके इर्द-गिर्द जो घने घने जंगल हैं उसमें एक मजदूर तक नहीं लगाया गया है वहीं विद्यालय में एक चापाकल है जिसका आज तक चबूतरा निर्माण नहीं हुआ। जिसके कारण बच्चे किसी तरह कीचड़ में जाकर अपना हाथ पांव धोते हैं और पानी पीते हैं। वहीं सरपंच चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि एक प्रधानाध्यापिका के द्वारा अपने ही सहायक शिक्षिका को जाति सूचक शब्द का प्रयोग कर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना पूर्ण रूप से कानून के खिलाफ है। इस प्रकार के व्यवहार से बच्चों का भविष्य भी अंधकार मय होता दिख रहा है। हालांकि इसी बीच हालांकि इसी बीच प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का आगमन भी विद्यालय में होता है जिनके द्वारा विद्यालय के कई रिकॉर्ड को चेक किया, जिसमें भारी अनियमित पाई गई जिस पर उन्होंने जांच रिपोर्ट तैयार कर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया है।




