मोकामा स्थित माँ मरियम का कैथोलिक चर्च, जहाँ देश – विदेश से आते हैँ ईसाई धर्मालम्बी!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

मोकामा ( पटना) । पौराणिक कथा के अनुसार मोकामा मुकुम ( घर) अमाह ( माँ) के नाम के नाम से जानी जाती थी, जिसका अर्थ माँ का घर है। बाद मोकामेह, मुकाम और अब मोकामा के रूप में जाना जाता है। यह स्थान एक राजकुमारी के इर्द- गिर्द घुमता है जिसकी शादी एक राजकुमार से होने वाली थी, परन्तु दुर्भाग्यवश आखेट और शिकार के दौरान राजकुमार की मृत्यु हो गया।
शोकाकुल राजकुमारी ने विवाह नहीं करने का निर्णय लिया। उसने यहाँ एक आश्रम बनाकर बीमार और जरूरतमंदों की सेवा करने का जीवन शैली को अपना लिया। लोग उन्हें प्यार से माँ मरियम कहकर पुकारने लगा। उनके सेवा भाव से लोग काफी प्रभावित हुए। उन्होंने प्रभु यीशु की आदमकद प्रतिमा भी लगाया और ईसाई धर्म के लोगों के लिए यह एक तीर्थ स्थल भी बन गया। माँ मरियम के मृत्यु के बाद ईसाई धर्मालम्बियो ने न केवल इसे माँ मरियम धाम तीर्थ स्थल बनाया जिसे हमारी लेडी आफ डिवाइन ग्रेस मोकामा तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ लोगों के सेवा के लिए नाजरथ अस्पताल भी खोला गया।
प्रत्येक वर्ष फरवरी माह के पहले रविवार को मां मरियम तीर्थ यात्रा का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों ‌श्रद्धालुओ सहित देश विदेश के ईसाई धर्मालम्बियो मोरिसस और उत्तर भारत के प्रमुख केन्द्रो पुरोहित और धर्माध्यक्ष भी भाग लेते हैं, बिहार के सभी चर्चों के भी पुरोहित और ईसाई धर्मालम्बियो का जमघट रहता है। धार्मिक रीति रिवाजों से माँ मरियम की तीर्थ यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा में लोग मन्नते भी मांगते है।
क्रिच्यियन वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से खिस धर्मालम्बियो के प्रकाश पर्व की तरह ईसाई धर्मालम्बियो के लिए माँ मरियम तीर्थ यात्रा के भव्य आयोजन की भी मांग की है।

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