रिपोर्ट अनमोल कुमार
गया। गुरु वन्दना, पिता महेश्वर के सभा कक्ष में आचार्य नवीन ने कहा कि सुखी जीवन का आधार साधन,संबंध और समझ है जिसे इसकी समझ जागृत हो जाएगी, उसका ही जीवन सुखी है। यह बातें उन्होंने जीवन विद्या कार्यक्रम के दौरान कही।
श्री नवीन ने कहा कि सेवा, अपेक्षा से ज्ञान उलब्ध कराना है। आज संवेदनशीलता को लोग सेवा का रूप मान लिया है।अपराध के अपने आपको शरीर मानकर लोग जी रहे हैं, मानवता के लिए शरीर नहीं जीवन को समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रयास से आचरण में बदलाव आएगा। स्थित अपराध और गलती की रहने पर गति संघर्ष, युद्ध और लडाई की ही होगी। उन्होंने कहा कि आकर्षण और प्रत्याकर्षण की दौड़ में स्थित के अनुसार ही गति बनी रहेगी।




