रिपोर्ट- धीरेंद्र पांडेय!
औरंगाबाद। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पंखाजूर में पुलिस व नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान मदन सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार की देर शाम उनके पैतृक गांव रिसियप थाना क्षेत्र के सड़सा गांव लाया गया। मदन सिंह का शव जैसे ही गांव में पहुंचा हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी और सभी शहीद के अंतिम दर्शन कर उनकी शहादत को नमन करते हुए भारत माता की जय वीर शहीद जिंदाबाद एवं जब तक सूरज चांद रहेगा मदन तेरा नाम रहेगा जैसे गगनभेदी नारे लगाए। इस नारे की गूंज कई गांवों तक पहुंची और सबों ने शहीद की शहादत के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना के जवानों ने जैसे ही शव को घर के सामने रखा पत्नी, बच्चों एवं अन्य परिजन फफक फफककर रो पड़े और उनके चित्कार से पूरा आकाश गूंज उठा। इस दौरान वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम हो गई। जानकारी के अनुसार शहीद मदन सिंह सड़सा गांव निवासी मानदेव सिंह के तीसरे नंबर के पुत्र थे। जिनकी उम्र महज 40 वर्ष थी। बताया जाता है कि उनकी पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में ही थी और ड्यूटी के दौरान आखिरी बार वे होली में अपने गांव आए थे।
शहीद मदन सिंह की शादी वर्ष 2001 में संजू देवी से हुई थी। जो गांव में ही अपने सास ससुर के साथ रहती है। शहद का बेटा शिवम रांची में इंटर कर रहा है। जबकि बेटी सिया नंदिनी बीए फाइनल ईयर की छात्रा है। शहीद की शहादत सुनकर उनके गांव में पहुंच कांग्रेस नेता अरबिन्द शर्मा ने कहा की ए बहुत दुःखद घटना है ऐसे भी ए परिवार बिहार बिभूति अनुग्रह बाबू के परिवार से जुड़ा हुआ परिवार से आते हैं क्योंकि इसी घर में उनका ससुराल था।आगे कहा कि आज हमारे जिला के लिए गर्व की बात है कि देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं । सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे और उनका अंतिम दर्शन किया।




