रिपोर्ट- अमित कुमार
पटना हाईकोर्ट से नीतीश सरकार को बड़ा झटका लगा है। पटना हाईकोर्ट ने बिहार में सरकारी नौकरी और उच्च शैक्षणिक संस्थानों के दाखिले में जातिय आधारित आरक्षण बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने वाले कानून को रद्द कर दिया है। पटना हाईकोर्ट ने आरक्षण बढ़ाने का फैसला रद्द कर दिया है। दरअसल, राज्य में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी होती है लेकिन बिहार सरकार ने आरक्षण को 65 फीसदी तक बढ़ा दिया था, जिसको हाईकोर्ट ने अब रद्द कर दिया है। बिहार सरकार के आरक्षण नीति को हाईकोर्ट ने क्यों खारिज किया याचिका करता के वकील दीनू बाबू ने बताया की बिहार में जातीय जनगणना के बाद राज्य सरकार ने आरक्षण का दायरा 50 % से बढ़ाकर 65 % कर दिया। और 10% जनरल कास्ट के लोगों को केंद्र सरकार ने पहले दे रखा है। राज्य में आरक्षण का दायरा 75% हो गया है। बचा 25 % में सभी वर्ग के लोग सरकारी नौकरी में आवेदन कर सकते हैं जो न्याय संगत नहीं है उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने जो आरक्षण का दायरा बढ़ाया था उसका गजट राज सरकार के तरफ से कराई गई थी उसे गजट में 10% को ऐड नहीं किया गया था। दीनू बाबू ने बताया कि आरक्षण का दायरा पापुलेशन के आधार पर नहीं बढ़ाया जा सकता है।
बाइट:- दीनू बाबू वरिष्ठ अधिवक्ता पटना हाई कोर्ट




