इलायची, जिसका नाम सुनते ही सुगंधित हो जाते हैं लोग ….

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

पूजा पाठ हो, हलवा हो, मिठाई हो, या पान हो इसके प्रयोग के बिना मजा किरकिरा हैं स्वाद ही नहीं सुंगध भी देती हैं किसी भी खाद्य पद्धार्थ में…. यहां तक लोग इसका उपयोग चाय में भी करते हैं ।
इलायची का सेवन आमतौर पर मुखशुद्धि के लिए अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। यह दो प्रकार की आती है- हरी या छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची। जहाँ बड़ी इलायची व्यंजनों को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है, वहीं हरी इलायची मिठाइयों की खुशबू बढ़ाती है। मेहमानों की आवभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है। लेकिन इसकी महत्ता केवल यहीं तक सीमित नहीं है। यह औषधीय गुणों की खान है। संस्कृत में इसे एला कहा जाता है।

क्या आप जानते हैं?

हरी इलायची न तो टहनियों पर लगती हैं ना ही जमीन के अंदर बल्कि इसकी जड़ से एक नया तना निकलर जमीन पर फैल जाता हैं जिस पर इलायची लगती हैं। इलायची को संस्कृत में सूक्ष्मैला, एला, उपकुन्चिका, तुत्त्था, कोरंगी, द्राविड़ी आदि नामों से जाना जाता है।

इलायची का पौधा 2 से 3 वर्ष में उत्पादन देने लगता हैं जो लगभग 10 से 12 वर्षो तक चलता है। केरल के माइलाडुंपारा में स्थित “भारतीय इलायची अनुसंधान केंद्र” इलायची की पारम्परिक खेती को बढ़ावा दे रहा है ।

इलायची उत्पादक देशों में भारत का नाम पहले नंबर पर आता है। भारत में इलायची का उत्पादन केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में सबसे ज्यादा किया जाता है। इलायची का पौधा पूरे साल हरा – भरा रहता है। इसकी पत्तियां एक से दो फीट लम्बाई की होती है। इलायची का इस्तेमाल मुखशुद्धि और मसाले के रूप में किया जाता है।

मसाले और खाने के अलावा इलायची का इस्तेमाल आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है।

इलायची की खेती वर्तमान मे किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। इलायची का पौधा 5 से 10 फीट की ऊंचाई का पाया जाता है। इलायची की खेती उष्णकटिबंधीय जंगलों में की जाती है। इसकी खेती के लिए छाया और समुद्री हवा में नमी का होना जरूरी होता है। इसकी खेती लाल और दोमट मिट्टी में की जा सकती है।

इलायची की खेती समुद्र ताल से 600 से 1500 मीटर की ऊंचाई वाली जगहों पर भी की जा सकती है। इसकी खेती के लिए 1500 मिलीमीटर बारिश का होना जरूरी है। इलायची की खेती के लिए हवा में नमी और छायादार जगह का होना जरूरी होता है।

इलायची की खेती के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है। लेकिन सर्दियों में न्यूनतम 10 डिग्री और गर्मियों में अधिकतम 35 डिग्री तापमान पर भी पौधा अच्छे से विकास करता है।

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