रचना – अनमोल कुमार
यूँ ही बेसब्र हो जाता हूँ
मैं कई दफा ए खुदा,
भूल जाता हूँ तेरी बक्शीश की
कोई तारीख नहीं होती।
टंकी के गर्म पानी के लिए
दुआ मांगी थी दिसम्बर में
वो जाके अब कबूल हुई है !
भगवान के घर देर है अन्धेर नहीं…
अबकी बार 48 डिग्री पार
अगली बार 50 डिग्री पार
भाजपा आएगी या,,
कांग्रेस आएगी,,
एनडीए आएगा या,,
इंडी गठबंधन आए
आप बस
घर के सामने
दो पेड़ जरूर लगाइए
छाया अवश्य आएगी।
नहीं किया तो,,,,,,,,
अबकी बार 48 डिग्री पार
अगली बार 50 डिग्री पार




