निभाष मोदी

कागजी निकासी ताबड़तोड़, ग्राउंड पर फिसड्डी!
लूट सके तो लूट की तर्ज पर नमामि गंगे योजना!
जहां एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत अभियान चलाने की बात कर रही है और दूसरी ओर नमामि गंगे परियोजना को काफी जोर-शोर से और काफी खर्चो के साथ पारित किया है वह योजना धराशाई होते दिख रही है।
ताजा मामला भागलपुर के विक्रमशिला पुल के नीचे गंगा घाट की है।भागलपुर विक्रमशिला पुल के नीचे गंगा घाट पर जहां की विक्रमशिला पुल के नीचे नमामि गंगे की बोर्ड भी लगी हुई है बावजूद यहां की स्थिति देखकर आप कह सकते हैं कि इस योजना का लोग कितना ख्याल रख रहे हैं या फिर स्वच्छ भारत अभियान योजनाओं को लोग कितना ध्यान में रख पा रहे हैं। गंगा घाट के एक ही जगह पर जहां लोग खुद भी नहा रहे हैं और जानवर भी उनके आसपास हैं इस घाट पर लोग गंगा स्नान कर अपने आप को शुद्ध व स्वच्छ साबित भी करते दिख रहे हैं।
बताते चलें कि स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ सुथरा करना और कूड़ा साफ रखना है यह अभियान 2 अक्टूबर 2014 को आरंभ किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को दासता से मुक्त कराया परंतु स्वच्छ भारत का उनका सपना पूरा नहीं हुआ वहीं दूसरी तरफ सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए नमामि गंगे नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया ।जले हुए शव को नदी में बहाने से रोका जा सके, लोगों और नदियों के बीच संबंध को बेहतर करने के लिए घाटों के निर्माण मरम्मत और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया जा सके परंतु भागलपुर विक्रमशिला पुल घाट पर दोनों योजनाएं ढाक के तीन पात वाली बात जैसी दिख रही है ।कहते हैं ना गई भैंस पानी में बिल्कुल यह योजना भी यहां पर ऐसे ही प्रतीत हो रही है आप कह सकते हैं सचमुच यह योजना गई पानी में। जबकि सरकार ऐसी योजनाओं पर अरबों खरबों रुपए खर्च कर रही है परंतु गंगा घाट के किनारे की स्थिति बद से बदतर होता जा रहा है।




