रिपोर्ट अनमोल कुमार
जिला मुख्यालय मधुबनी अंतर्गत जयनगर अनुमंडल स्थित मौजूद है शिलानाथ महादेव मंदिर ,इस मंदिर को शीलबत्ती महादेव मंदिर के नाम से भी जानते है ।यह मंदिर जयनगर के दुल्लीपट्टी पंचायत में स्थित है तथा इस मंदिर के इर्द गिर्द डीबी कॉलेज,स्कूल,आंगनबाड़ी केंद्र ,बैंक ,अन्य मन्दिर ,पंचायत भवन ,पैट्रोल पम्प मौजूद है ।इस मंदिर में प्रत्येक रविवार एवं सोमबार को काफी भीड़ रहती है ।सावन माह में इस मंदिर का अलग ही महत्व है ,सावन माह में भक्तो की काफी भीड़ रहती है ।जयनगर कमलां नदी से पवित्र जल भरकर शिलानाथ महादेव मन्दिर एवं मधुबनी जिला के रहिका स्थित कपलेश्वर महादेव मंदिर में हजारों हजार की संख्या में भक्तो द्वारा जलार्पण किया जाता है ।शिलानाथ महादेव मंदिर में आने के लिए बस,टैम्पू,ई रिक्सा,निजी वाहन से जाया जा सकती है ,इस मंदिर में आने ले लिए तीन से चार किलो मीटर की सफर किया जाता है ।शिलानाथ महादेव मंदिर परिसर में अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित है साथ मे नन्दी की प्रतिमा भी मौजूद है ।इस मंदिर के बगल में ददरी पोखर है ,इस बात का जिक्र रामायण काल मे भी मिलता है ऐसा मान्यता है कि जब अयोध्या से चलकर माता सीता की नगरी जनकपुर धाम श्री रामचन्द्र भगवान के साथ विवाह के लिए चले थे तो इसी जगह महर्षि विस्वामित्र इस जगह पर विश्राम किये थे एवं एक ही रात्रि में इस पोखर का निर्माण किया गया था ।
इस मंदिर के इतिहास रामायण में भी मिलता है ।
इस महादेव मंदिर का इतिहास मिलिजानकारी अनुसार इस शिलानाथ मन्दिर के अगल बगल कमलां नदी बहता था एक बार नदी में बाढ़ आने से पुराना महादेव मंदिर जलमग्न हो गया और इस मंदिर परिसर में बहुत सारे कबूतर रहते थे ,मन्दिर के जलमग्न होने के कारण जब कबूतर आकाश में उड़ने लगा तो दिन में ही तीन किलोमीटर के आसपास अंधेरा हो गया था ।लोगो से ली गई जानकारी अनुसार इस मंदिर से बहुत दिनों बाद अपने आप शिवलिंग प्रकट हुई और कमलां नदी पूर्व की ओर मुड़ते चली गई ,आज भी किसान जब खेती करते है तो मन्दिर के आसपास की जमीन के नीचे से बालू निकलता है ।इस महादेव मंदिर को मनोकामना मन्दिर ,शीलबत्ती महादेव मंदिर के नाम से भी विख्यात है ।सावन माह में झांखी सहित अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और कार्तिक पूर्णिमा के रोज शिलानाथ मन्दिर परिसर में मेला का आयोजन किया जाता है और इस मेला में नेपाल सहित भारत के अन्य जगहों से भक्तो का आगमन होता है ।ऐसा मान्यता है कि शिलानाथ मन्दिर परिसर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कुआ हुआ करता था ,उस कुआं के पानी का सेवन करने से चर्म रोग,घेघा रोग ,पेट की बीमारी ठीक हो जाया करती थी आज उस कुआ का अस्तित्व खतरे में है तथा स्थानीय वासिनदाओ के द्वारा उस कुआं में कूड़ा करकट एवं मिट्टी डाल कर भर देने का कार्य किया गया है ।इस बाबत मन्दिर के पुजारी ने बतलाया कि वर्षो पूर्ब हम लोगो का पूर्वज यहां आया तो इस जगह पुराना एवं खण्डर युक्त मन्दिर था उसी समय से हमलोगों सहित स्थानीय लोगो द्वारा पूजा अर्चना किया जाता रहा है और समय समय पर मन्दिर का नवीकरण किया गया है तथा यहां अंकुरित महादेव विराजमान है ।भक्त स्वाति कुमारी एवं श्रुति कुमारी ने बतलाया कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस मंदिर में आते है और सच्ची लग्न एवं श्रद्धा से पूजा कर जो भी मांगते है उस भक्तो की मनोकामना पूर्ण होती है ।पूर्व जिलापदाधिकारी निधि खड़े को भी इसी मन्दिर में मनोकामना पूर्ण हुई थी एवं उसे पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई थी ।इस मंदिर परिसर में समय समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और सन्ध्या आरती के समय भक्तो की भीड़ और आरती में काफी भीड़ रहती है और दूर दराज से भी भक्त गन आते है ।




