:- रवि शंकर अमित!
*सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राजद जैसे विपक्षी दलों को लगा करारा झटका
*बैलेट से चुनाव की मांग कर राजद फिर कायम करना चाहता था जंगलराज
- 1990 से लेकर 2004 तक बैलेट पेपर के माध्यम से हुए कुल 9 चुनावों में हुई हिंसक घटनाओं में 641 लोग मारे गए थे
- 1998 के लोकसभा चुनाव में राजद के दो दर्जन मंत्री,विधायकों पर बूथ लूट,हिंसा व मतदान में बाधा के दर्ज हुए थे मुकदमे
*2004 में छपरा तो 90 के दशक में पटना और पूर्णिया के चुनाव हुए थे रद्द
पटना 26.04.2024
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपेट को लेकर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर बूथ लूट कर चुनाव जीतने के विपक्ष के मंसूबे को ध्वस्त कर दिया है। ईवीएम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार में राजद जैसे दल के मतपेटियां लूटने वालों को करारा जवाब मिला है। उन्होंने कहा कि डेढ़ दशक तक बिहार में बूथ लूट और चुनाव के दौरान हिंसा का नंगा खेल खेलने वाला राजद ने अन्य विपक्षी दलों के साथ पिछले कई वर्षों से अभियान चला कर ईवीएम को बदनाम किया जबकि भारत के चुनाव सिस्टम की दुनिया में तारीफ हो रही है।
श्री चौधरी ने कहा कि आज राजद अपने दौर के बूथ लूट और चुनावी हिंसा को भूल गया है। 1990 से लेकर 2004 तक बैलेट पेपर के माध्यम से हुए लोकसभा, विधानसभा व पंचायत के कुल 9 चुनावों में हुई हिंसक घटनाओं में 641 लोग मारे गए थे। 2000 के विधानसभा चुनाव में 39 स्थानों पर फायरिंग हुई थी तथा चुनावी हिंसा में 61 लोग मारे गए थे। 1990 में 87 तथा 1999 में 76 लोग चुनावी हिंसा के शिकार हुए थे। 2001 के पंचायत चुनाव में 196 लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
उन्होंने कहा कि 1998 के लोकसभा चुनाव में राजद के दो दर्जन मंत्री,विधायकों पर बूथ लूट,हिंसा व मतदान में बाधा उत्पन्न करने के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। बिहार देश का अकेला ऐसा राज्य था जहां चुनावी हिंसा और बूथ लूट के कारण सर्वाधिक पुनर्मतदान कराने की नौबत आती थी। बड़े पैमाने पर बूथ लूट और हिंसा का ही नतीजा था कि 2004 में छपरा लोकसभा क्षेत्र जहां से लालू प्रसाद चुनाव लड़ रहे थे तथा 90 के दशक में पूर्णिया और दो-दो बार पटना लोकसभा का चुनाव स्थगति करना पड़ा था। 1995 के बिहार विधान सभा चुनाव में बूथ लूट की व्यापक शिकायत पर ही 1668 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान कराना पड़ा था।
2005 में एनडीए की सरकार आने के पहले हर चुनाव में बूथ लूट, हिंसा, मारपीट, बैलेट बॉक्स की छीना झपटी, बक्शे में स्याही डालने की घटना आम थी। आम मतदाता से लेकर मतदानकर्मी तक चुनाव से डरे-सहमे रहते थे। राजद-कांग्रेस बूथ लूट के जरिए ही अपनी चुनावी जीत सुनिश्चित करते थे और लालू इसी को बोतल से जिन्न निकलना बताते थे। ईवीएम से होने वाले चुनाव की पारदर्शिता के बाद न केवल इनकी लूट पर रोक लगी बल्कि इनका चुनावी ग्राफ भी नीचे चला गया। झूठे आरोप लगा कर ईवीएम का इसलिए विरोध कर रहे हैं ताकि एक बार फिर चुनावी हिंसा के जरिए जंगल राज कायम किया जा सके।




