नेहा कुमारी सिटी रिपोर्टर
बेगूसराय बखरी में तैलिक वैश्य संघ के तत्वावधान में दानवीर भामाशाह की 471 वीं जन्म जयंती मनायी गई। तैलिक वैश्य भवन में आयोजित किया गया। जयंती समारोह में संबोधित करते हुए संरक्षक समिति के संयोजक पूर्व पार्षद सिधेश आर्य ने कहा कि भारत के भाल पर भामाशाह रक्त चंदन की तरह विराजमान हैं। राष्ट्र की अस्मिता तथा मेवाङ के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। राजपूताने के प्रधानमंत्री और सेनानायक के रूप में उन्होंने साबित किया कि वणिज व्यापार करने वाला वैश्य समाज राष्ट्र की रक्षा तथा उसके स्वाभिमान के लिए तलवार भी उठा सकता है। बोले,इतिहासकारों ने हमेशा महान राष्ट्र भक्त दानवीर भामाशाह के योगदान की उपेक्षा की है। आजादी के बाद भी जिस देश की पाठ्यपुस्तकों में विदेशी आक्रांता अकबर को महान बताया जाता रहा हो,वहां प्रताप की शूरवीरता तथा भामाशाह की दानशीलता को जगह मिलना मुश्किल तो होगा ही? एनसीआरटी की पुस्तकों से गायब रहे भामाशाह, तो गूगल ने गायबल्स को भी मात देकर विकिपिडिया में उन्हें ओसवाल जैन,तो जाति में तेली दिखा कर भ्रम फैलाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे इतिहास, हमारी विरासत को भ्रामक बताने का षडयंत्र भी है। अध्यक्षता करते हुए तैलिक वैश्य संघ के अध्यक्ष अजय साह ने कहा कि महाराणा प्रताप के शासन काल में भामाशाह मेवाङ के सेनानायक हुआ करते थे। पांच सौ साल बाद उसी समृद्ध विरासतों को जीवंत करते हुए आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, तो देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री हीरा कुमार साह ने किया। मौके पर पूर्व अध्यक्ष त्रिपुरारी साह, पूर्व पार्षद नीरज नवीन,कांग्रेस के नगर अध्यक्ष प्रेम कुमार पप्पू, कृष्कांधा, अरविंद साह, विकास कुमार साह, विक्रम कुमार, राजेन्द्र साह राजो,दिनेश साह भंकुल,रितेश कुमार,पवन कुमार आदि मौजूद थे। जयंती समारोह में मौजूद लोगों ने दानवीर भामाशाह की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धा पूर्वक नमन भी किया।




