पर्यटन स्थल विक्रमशिला की सैर करनी है तो गड्ढों में चलकर धूल फांकने पड़ेंगे!

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रिपोर्ट:— धीरज शर्मा

30 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगेंगे 3 घंटे!

भागलपुर। सबौर से कहलगांव की दूरी महज ही 30 किलोमीटर है परंतु इस 30 किलोमीटर को तय करने में कम से कम 3 घंटे लगते हैं । रोड की स्थिति यह है कि अगर ट्रक का जाम लग गया तो दिन भर भी एक ही जगह पर रहना पड़ सकता है।एनएच 80 के किनारे जितने भी मकान बने हैं दिन-रात उन्हें धूल का सामना करना पड़ता है । बताते चलें कि कहलगांव से सटे विक्रमशिला पर्यटन स्थल है एवं नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन(एनटीपीसी) है वहां के लिए कोई उच्च अधिकारी अगर आते हैं और सड़क मार्ग से उन्हें जाना हो तो रातों-रात उनके लिए सड़क बन कर तैयार हो जाती है और साहब के जाते ही वह सड़क फिर अपनी अवस्था में तब्दील हो जाती है ।

आखिर इस पर कोई सुध लेने वाला क्यों नहीं ।आए दिन नेता राजनेता कहते फिरते हैं की इस एनएच 80 का टेंडर हो चुका है, अब यह बनने वाला है ,अब बनकर तैयार हो जाएगा, परंतु धरातल पर कुछ भी क्यों नहीं दिखता। चाहे कांग्रेस के नेता सदानंद सिंह हों, बीजेपी के पवन यादव हों या फिर जदयू के अजय मंडल सबो की बातें हवा हवाई होते दिखती हैं ।शायद सभी पार्टी के नेता जनता को ठगने का काम करती है , सभी राजनेता जनता को गुमराह करने का काम करते हैं ।समय आने पर बड़े बड़े वायदो के पूल बांधा करते हैं और कुर्सी मिलते ही अपने वायदे को भूल जाते हैं। जितने भी यात्री इधर से गुजरते हैं सबों को काफी डर बना रहता है कहीं दुर्घटना ना हो जाए। आए दिन दुर्घटनाएं होती ही रहती है लेकिन फिर भी कोई सांसद कोई विधायक इस पर सुध लेने वाला नहीं। ताजा मामला सबौर का है, कुछ लोगों से मीडिया कर्मी बात कर रहे थे तो उनका कहना हुआ इस रास्ते से जाने में डर लगता है और लगता है कि कोई दुर्घटना ना हो जाए ,बड़े पदाधिकारी अगर सड़क मार्ग से जाते हैं तो रातों रात सड़क को तैयार किया जाता है लेकिन सुबह होते ही वह सड़क की स्थिति फिर पूर्णरूपेण पहले की तरह हो जाती है। इसका मतलब यह होता है कि सिर्फ साहब को दिखाने के लिए एकपतली सी परत डाल दिया जाता है और फिर सड़क धराशाई हो जाती है।बिहार सरकार की कार्यशैली व वायदे खोखले नजर आ रहे हैं। नितीश कुमार के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर विकास को लेकर योजनाओं का हाल बद से बदतर देखने को मिल रहा है। आए दिन एनएच 80 पर अनगिनत घटनाएं होती चली जा रही है उसका सिर्फ और सिर्फ कारण सड़क का गड़बड़ होना है इस पर कई नोटिस जारी की गई कितने राजनीतिक पार्टियां राजनीतिक सरगर्मियां को तेज कर इसे बनाने का वायदा तो किए लेकिन यह अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है, बहरहाल सोचने वाली बात यह है कि आखिर इस पर सुध लेने वाला कोई नहीं ऐसा क्यों ?जबकि यह सड़क एनएच 80 कई जिलों व राज्यों को जोड़ती है। थोड़ी भी बारिश हो जाय तो सब कुछ बयां कर देती है यह एनएच 80 मुख्य मार्ग। सचमुच सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का दावा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर विकास तो है लेकिन सिर्फ कागजी स्तर पर ?धरातल स्तर पर क्यों नहीं?यू कहना गलत नहीं होगा की जनता को सिर्फ मूर्ख बनाया जाता रहा है।
बताते चलें की यहां के लोग जल जमाव से भी त्रस्त हैं, उन्हें गड्ढों से चलकर आवागमन करना पड़ता है जिससे कभी भी बड़ी घटना घट सकती है । सड़कों की तस्वीर ही बयां कर देती है बिहार के मुखिया की कार्यशैली तो हम और आप क्या कहेंगे। घटनाओं पर घटनाएं होती चली जा रही है पर किसी राजनेता पर जूं तक नहीं रेंग रही।

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