अस्पताल में सुविधा के आभाव के कारण DMCH के जूनियर डॉक्टर ने खुद को किया काम करने से इनकार!

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धर्मेंद्र पांडे की रिपोर्ट!

अस्पताल अधीक्षक ओऔर कॉलेज के प्रिंसिपल से कई बार कर चुके है सुविधा उपलब्ध कराने की मांग!डाक्टर का आरोप आपातकालीन अस्पताल में न बेड है न वार्ड, न ICU न ही OT और COT तो कैसे करे इलाज़ !

दरभंगा का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल DMCH क्या सिर्फ हाथी के दांत बन कर रह गए है क्या इतने बड़े अस्पताल में मरीज़ों के सुविधा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति है । ये सवाल इस लिए खरी हो रही है कि अब यहाँ काम करनेवाले जूनियर डॉक्टर ने सुविधा के अभाव में आज से काम करना बंद कर दिया यानी की अपने आप को जूनियर डॉक्टर फिलहाल यहाँ किसी मरीज का इलाज़ तब तक नही करेंगे जब तक कि उन्हें मरीजो के इलाज़ के लिए मूल भूत सुविधा नहीं दी जाती ।

मतलब साफ है अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने वाले जूनियर डॉक्टर पहली बार आम जनता के हित की बात को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर एक तरह से चले गए है हलाकि इससे भी आम गरीब मरीज़ों का नुकसान होगा । हड़ताल पर गए डॉक्टर की बात माने तो इलाज़ करने वाले डॉक्टरों की समस्या यह है कि जब इलाज़ करने के लिए मरीज को महज एक बेड तक नही मिले तो डॉक्टर इलाज़ कहा करे और कैसे करे ? दूसरा मरीज का ऑपरेशन किया तो मरीज को शिफ्ट करने के लिए कोई वार्ड नहीं ऐसे में ऑपरेशन के बाद भी मरीज उसी बेड पर परा है कहा ले जाये पता नही , दूसरे मरीज का ऑपरेशन फिर कहा करे जब ऑपरेशन के बेड ही खाली न हो, इसके अलावा आपातकालीन सेवा के लिए आये मरीज के लिए न अस्पताल में ICU है न CCW, न ही OT है न ही COT आखिर ऐसे हालात में डॉक्टर कैसे मरीज़ों का इलाज़ करे और कैसे लोगो की जान बचाये, डॉक्टर अस्पताल की व्यवस्था के कारण नाहक बदनाम होता है कई बार तो लोगो के गुस्से का भी शिकार होना पड़ता है ।

जूनियर डॉक्टर के अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि ऐसा नही की यह फैसला अचानक लिया गया बल्कि दो महीने से लगातार वे लोग अस्पताल अधीक्षक ओर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से भी संपर्क किया लेकिन किसी ने इस समस्या का समाधान नहीं किया यही वजह है कि ऐसी व्यस्था में मरीज़ों का इलाज़ सम्भव नही है।

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