नेहा कुमारी की रिपोर्ट
बेगुसराय में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की जिलास्तरीय एक संगठनिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बिहार प्रदेश अध्यक्ष समेत कई बड़ी संख्या में बाहर से आए चित्रांशों ने उनका स्वागत किया बैठक की अध्यक्षता पुराने अग्रज राधा कृष्ण प्रसाद सिन्हा ने किया। बैठक में इस बात दुख प्रगट किया गया की कायस्थों की दशा को सुधारने वास्ते कुछ विशेष पिछले कई वर्षों से नहीं किया जा रहा है। और चारों ओर लोग हतोत्साहित एवं परेशान है । राधा प्रसाद सिन्हा ने स्वागत भाषण करते हुए कहां बताया कि 27 जुलाई को एक बड़ी बैठक में, सर्वसम्मति से अशोक कु. सिंहा अध्यक्ष, नवीन कुमार सिंहा, महामंत्री, राजकुमार नवाब एवं राजेशश्रीवास्तव कोषाध्यक्ष चुने गए।
बैठक में करतल ध्वनि से तीनों का स्वागत किया गया। उपस्थित सैकड़ों महिला पुरुषों के बीच, नगर के गणमान्य चित्रांश, तथा दिलीपसिंहा, समीर शेखर, गंगाबाबू, दइनएशबआबू, शंभूबाबू, मुकेश बाबू आदि ने समाज की दशा दिशा पर चिंता व्यक्त की तथा नवनिर्वाचित लोगों से काफी उम्मीद रखते हुए, शुभकामना दी। अध्यक्षीय भाषण में, अशोक कुमार सिंहा ने, पुरानी और नियम कानून की अवहेलना करते हुए विराजमान समिति के कार्यकलाप के प्रति क्षोभ प्रकट किया तथा प्राणपण से आम कायस्थों के हित में बेहतर करने का विश्वास दिलाया।उन्होंने सभी से गिरे शिकवे भूलकर जुड़ने तथा नई उर्जा से काम करने का आवाह्न किया, त्रुटियों हेतु क्षमा याचना की। बाहर से आए पदाधिकारियों ने अपने -अपने ओजस्वी भाषण में ,ऊपर के पूरे सहयोग का वचन दिया ।
प्रदेश स्तर पर घोर असंतोषजनक स्थिति के आलोक में उनलोगों ने वस्तुस्थिति से हम सभी को अवगत करवाया तथा अंत में प्रांतीय अध्यक्ष श्री सुजीत कुमार वर्मा ने अपनी गंभीर बातें, सरल तरीके से रखी।
उन्होंने कहा कि आम चित्रांश अब संगठन की निष्क्रियता को सहन करने की स्थिति में नहीं और विवश होकर उनलोगों को आगे आना पड़ा।
उन्होंने सदैव आगे रहकर सहयोग का आश्वासन दिया तथा बेगूसराय टीम को शुभकामना दी। रवींद्र मनोहर, संजयकुमार, उत्तम कुमार, भास्कर भूषण ,प्रकाशजी,राजीवजी,संदीप जी,आदि के अथक परिश्रम से कार्यक्रम सफल हुआ,विशेष धन्यवाद के पात्र श्री राधाबाबू रहे जो अस्वस्थता में भी पधारें।
सर्वश्री सुजीत कुमार वर्मा, आशुतोष नारायण सिंहा,प्रमोद सिंहा,राजेश सिंहा, अमिताभ वर्मा, अरुण कर्ण, सत्येंद्र नारायण,अपलेंद्र सिंहा, रणजीत श्रीवास्तव आदि बाहर से पधारें।




