नवजातों को माँ का दूध नहीं पिलाना संकीर्ण सोंच, मौलिक अधिकारों का हनन!

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रिपोर्ट – संतोष तिवारी

बिहार /मुज़फ़्फ़रपुर

बच्चें को जन्म देने के बाद माँ बच्चें के जन्मसिद्ध मौलिक अधिकारों का कर दे रही हनन, यह चौकाने वाली परिस्थितियां ऐसी समाज की बन रही है कि आपको और हमको हर किसी को झकझोड़ कर रख दे रही है यह खबर ,आइये देखते है खास रिपोर्ट संतोष तिवारी की

मानवता के मूल्यों में बहुत बड़ी बाधक बन रही संकीर्ण सोच , जन्म लेते ही बच्चों के पहले अधिकारों को छीन ले रही है ज्यादातर माँ यह चौकाने वाले आंकड़े से खुलासे के बाद शायद कोई शब्द नही बच रहा है जिससे निंदा की जा सके , जन्म देने के बाद ज्यादातर माँ अपने बच्चों को माँ के दूध से महरूम कर दे रही है , दूध नही पीने देती बच्चों को उसके आहार के रूप में , जबकि डॉक्टर का मानना है और दवा है कि माँ का ही दूध सर्वोत्तम है बच्चे के लिये , वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण शाह ने एक आंकड़ा निकालने की कोशिश की इसके लिए की आखिर कितना प्रतिशत माँ अपने बच्चे को अपना दूध नही देती है इसमें चौकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे है , बच्चे को जन्म लेने के बाद उसके पहले अधिकारों का हनन उसकी माँ कर दे इससे बड़ी बिडम्बना और कुछ हो ही नही सकती आखिर कहा जा रहा है अपना समाज आज हर किसी को सोचने की जरूरत है , आइये समाज में चेतना पैदा करें एक मुहिम

बाइट :- डॉक्टर अरुण शाह वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ

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